किसान के लिए आलू की खेती(aaloo ki kheti) की पैदावार कैसे बढ़ाये

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(aaloo ki kheti) आलू की KHETI अच्छी पैदावार लेने के लिए अच्छे गुणवत्ता युक्त बीज का अत्यधिक महत्व है। वायरल और बीज जनित बीमारियों के कारण बीज की गुणवत्ता में काफी कमी आ जाती है। वायरस के संक्रमण से उपज भी प्रभावित होती है। एफिड और सफेद मक्खी आलू फसल के मुख्य कीट हैं जो संक्रमण करके स्वस्थ पौधों में वायरस फैलाते हैं। इसलिए बीज आलू की गुणवत्ता बनाए रखने और अधिक उपज प्राप्त करने के लिए बीज की फसल को वायरस मुक्त होना चाहिए और बीज फसल को एफिड और सफेद मक्खी से बचाना चाहिए।

रसायनों का प्रयोग करके या कीट वैक्टरों से 100% सुरक्षा प्राप्त करने के लिए एक भौतिक संरचना/ढाँचा बनाकर बीज आलू की फसल की सुरक्षा का एक अच्छा स्तर प्राप्त किया जा सकता है। इन दोनों तकनीकों को संयुक्त रूप से अपनाने की आवश्यकता है और आसानी से कीट मुक्त नेट स्थापित करके और किसानों के खेतों में फसल में सुरक्षात्मक छिड़काव करके स्वस्थ बीज का उत्पादन किया जा सकता है। साथ ही बीज की गुणवत्ता में बिना किसी कमी लाये इसको कई पीढ़ियों के लिए शुद्ध बीज के रूप में प्रयोग किया जा सकता है।

किसान भाइयो के लिए आलू की खेती (aaloo ki kheti) में कीड़ा मुक्त उपाय

  • आलू बीज की फसल को वायरस मुक्त कीट वैक्टरों से सुरक्षा प्राप्त करके। बीज की गुणवत्ता बनाकर आलू की अधिक उपज प्राप्त करने के लिए उपयोगी।
    कीट मुक्त नेट हाउस स्थापित करके किसानो के खेतों में लंबे समय के लिए स्वस्थ बीज का उत्पादन करना।
  • किसानों की सहकारी संस्थाओं से बीज प्राप्त करने की निर्भरता को कम
    करना।
    लम्बी अवधि के लिए किसानों द्वारा आलू फसल की उत्पादन लागत कम की जा सकती है।
  • किसान अच्छे गुणवत्ता वाले बीज पैदा कर उसको अन्य किसानों को बेच कर आर्थिक लाभ कमा सकते हैं।
  • कीटमुक्त नेटहाउस का निर्माण करना – आलू के गुणवत्ता युक्त बीज उत्पादन लिए कीट मुक्त नेटहाउस अच्छे साबित होंगे इसकी संरचना को तैयार करने के निम्न अवयवों की आवश्यकता होती है।
  • • कीट मुक्त एंट्री चेंबर में दो दरवाजे (डोर) जिनमें लॉक सिस्टम लगा हो ।
  • नेट हाउस की संरचना हेतु चकोर लोहे के पाइप (1.5 इंच व्यास) के खंभे ।
  • नेट हाउस की संरचना को ढकने के लिए 40 मेश अल्ट्रा वायलेट युक्त नायलॉन नेट।
  • नेट हाउस के अंदर फसल की सिंचाई के लिए नालियाँ अथवा स्प्रिंकलर या ड्रिप सिस्टम ।

Aaloo ki kheti की उन्नत किस्में

1. कुफरी अलंकार

कुफरी अलंकार आलू की उन्नत किस्मों में से एक है। यह किस्म मध्य पहाड़ियों में पायी जाती है और खेती के लिए बहुत प्रसिद्ध है। कुफरी अलंकार की विशेषता उच्च पैदावार और बड़ी आकार की आलू होती है। इसका उत्पादन खाद-उर्वरक के उपयोग से बढ़ाया जा सकता है।

2. कुफरी पुखराज

कुफरी पुखराज भी आलू की उन्नत किस्मों में से एक मानी जाती है। यह आलू बहुत अच्छी पैदावार देती है और बीजों से बुवाई की जाती है। कुफरी पुखराज के उत्पादन में भी खाद-उर्वरक का प्रयोग करने की सलाह दी जाती है।

3. कुफरी चंद्रमुखी

कुफरी चंद्रमुखी आलू की एक अन्य प्रमुख किस्म है जो उच्च पैदावार के लिए प्रसिद्ध है। इसकी खेती की जा सकती है और इससे अधिक मुनाफा कमाया जा सकता है। यह भी खाद-उर्वरक के साथ उचित पानी प्रबंधन की आवश्यकता होती है।

4. कुफरी अशोका

कुफरी अशोका भी आलू की उन्नत किस्मों में से एक है। इसकी खेती सामान्यतः पहाड़ी इलाकों में की जाती है। यह किस्म मध्यम पैदावार और अच्छी गुणवत्ता वाली आलू देती है।

मध्यम अवधि वाली किस्में

5. कुफरी बहार

कुफरी बहार आलू की मध्यम अवधि वाली एक प्रमुख किस्म है। यह आलू बहुत अच्छी पैदावार देती है और कम समय में पक जाती है। इसका उत्पादन खाद-उर्वरक के साथ बुवाई करके किया जाता है।

6. कुफरी लालिमा

कुफरी लालिमा भी मध्यम अवधि वाली किस्म है और खेती के लिए उपयुक्त है। यह आलू बहुत बड़ी पैदावार देती है और गुणवत्ता में भी उत्कृष्ट होती है।

7. कुफरी सतलुज

कुफरी सतलुज भी मध्यम अवधि वाली किस्म है जिसमें कम खर्च में अधिक पैदावार होती है। यह आलू खेती के लिए आदर्श है और इसकी बुवाई बीजों से की जाती है।

8. कुफरी सदाबहार

कुफरी सदाबहार भी आलू की मध्यम अवधि वाली किस्म है जिसकी खेती की जा सकती है। यह आलू प्रमुख बाजारों में चलती है और अधिक मुनाफा कमाने का अवसर प्रदान करती है।

देर से पकने वाली किस्में

इसके अलावा, आलू की देर से पकने वाली किस्में भी उत्पादित की जाती हैं। इन किस्मों में खेती की जाती है और उच्च पैदावार देती हैं। कुफरी सिंधुरी, कुफरी फ्ऱाईसोना, और कुफरी बादशाह इस श्रेणी के उदाहरण हैं।

इन उन्नत किस्मों की खेती करके किसान अपने आलू के उत्पादन में वृद्धि कर सकते हैं। इन्हें उचित खाद-उर्वरक के साथ बुवाई करने और पर्याप्त समय पर पानी प्रबंधन करके उच्च पैदावार की संभावना होती है।

आलू की खेती (aaloo ki kheti) के लिए नेट हाउस संरचना

  • नेट हाउस की संरचना दो प्रकार की हो सकती है।

स्थायी नेट हाउस

इस प्रकार के नेट हाउस की संरचना को स्थायी रूप से प्रतिस्थापन किया जा सकता है। इसे 2-3 साल तक प्रतिस्थापित कर उसके बाद हटाया जा सकता है किन्तु यदि फसल को 5-6 वर्षों तक उगाने की आवश्यकता होगी तो इस नेट हाउस का प्रयोग किया जा सकता है तथा पुनः हटा दिया जाता है। इस प्रकार के नेट हाउस को प्रतिस्थापित करने की लागत रु 85000/= प्रति 260 वर्ग मीटर क्षेत्रफल आती हैं। नेट हाउस के नेट को फसल लेने के बाद जितना जल्दी हो सके हटा दिया जाना चाहिये ताकि नेट को लम्बे समय तक सुरक्षित रूप से उपयोग में लाया जा सके।

अस्थायी नेट हाउस

इस प्रकार के नेट हाउस को बनाने के लिए संरचना एवं नेट दोनों को फसल लेने के बाद हटा दिया जाता है। इसकी स्थापना में बांस

अथवा लकड़ी के खम्भे, नेट एवं तार के साथ इसकी लागत लगभग रू 45000/- प्रति 260 वर्ग मीटर आती हैं। इस प्रकार के नेट हाउस को प्रतिस्थापित करके 5-6 वर्ष बाद द्वारा बनाने की आवश्यकता होती हैं।

नेट हाउस का आकार और विवरण

30-35 हेक्टर आलू की खेती करने के लिए 260 वर्ग मीटर आकार का एक नेट हाउस पर्याप्त है। नेट हाउस के निकलने वाले बीज का उपयोग इस प्रकार किया जा सकता है कि अगले वर्ष की फसल के लिए नेट हाउस के लिए प्रत्येक वर्ष 1.25 क्विंटल बीज रखा जा सकता है।

आलू की खेती में कुछ आवश्यक सामग्री

लोहे के पाइप (साइज 2 x 2 x 1/8 इंच ) 6.5 फुट लम्बाई के 13 टुकड़े, 21 फुट लंबाई के 8 टुकड़े, 13.5 फुट लम्बाई के 25 टुकड़े, 8 फुट 9 इंच के 4 टुकड़े, 6 फुट के 4 टुकड़े, 40 फुट के 4 टुकड़े लोहे के कोण (साइज 3×3×1/8 इंच )-54 टुकड़े, 6 फुट उचाई एवं 4 फुट चौड़ाई आकार के दरवाजे लोहे के पाइप आकार 3X3X 1/18 इंच) लम्बाई के 14 टुकड़े, लोहे की पत्ती (1.5 चौड़ी 1/5 इंच मोटाई) के 1 मी लंबे 50 टुकड़े, स्क्रू नट 250। नायलॉन नेट कवर 40 मेश (एक इंच में 40 धागे); सिले हुये 21 x 2 मीटर आकार के दो पीस, 21 X 14 मीटर आकार का एक पीस,

14 X 1.2 मीटर आकार के दो पीस, 2X 1.3

मीटर आकार के दो पीस,

2.6 X 1.3 मीटर के दो पीस आकार के दो पीस तैयार चाहिए यानि कुल नेट की आवश्यकता 425 वर्ग मीटर है• साइड पोल गाड़ने के लिए 18 इंच की गहराई तक छेद बनाने के लिए बरमा

नेट हाउस के साइड पोल जो जमीन में दबे हैं उनके लिए एक लीटर पेंट

आलू की खेती को कैसे स्थापित कैसे करें

  • ध्यान रहे कि नेट हाउस स्थापित करने के लिए खेत अथवा चुनी हुई जगह जानवरों के प्रवेश से संरक्षित हो।
  • सर्वप्रथम माप और क्षेत्र को चिहिन्त करें।
  • • आलू के अच्छी गुणवत्ता वाले बीज कंदों की रिज में या चौड़े बेड सिस्टम में प्लांटर या हाथ से लगाते हैं।
  • कन्दों के अंकुरण पूर्व नेट हाउस लगा लेना चाहिए।
  • सर्वप्रथम पाइप गाड़ने वाली जगह को चिहिन्त करें और बरमा के साथ 45 सेमी गहरे छेद खोदें।
  • छेद में पोल डालें और किनारों पर मिट्टी को चढ़ा दें।
  • सभी साइड पोल के शीर्ष को उपर वाले पाइपों से आपस में कनेक्ट करें।
  • नेट हाउस में कीड़े के प्रवेश से बचने के लिए खेत में पोल के निचले हिस्से
  • पर नेट को मिट्टी से दबाने की व्यवस्था करें।
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नेट हाउस में बीज फसल को उगाना

अक्टूबर माह में नेट हाउस की भूमि को अच्छी प्रकार तैयार करके उसमें संस्तुत की गयी खाद एवं उर्वरकों की मात्रा को मिलाकर अन्दर के क्षेत्रफल में टैक्टर चालित रिजर मशीन से अथवा फावड़े से गूले बनाये 20 x 13 वर्ग मीटर लम्बाई में चलने के लिए मध्य में एक 1 मीटर चौड़ा रास्ता बना लेते हैं जिस पर मध्य में गढे नेट हाउस के सपोर्ट करने के लिया खम्बे लगे होते हैं।

रास्ते के दोनों और 6 मीटर लम्बाई की गूल तैयार करके उन पर 20 सेमी दूरी पर अंकुरित कन्दों की खुरपी से बिजाई की जाती है। सिंचाई करने हेतु की नाली बनाते हैं ध्यान रहे की कन्दों के अंकुरित होने से पूर्व नेट हाउस संरचना में नेट अवश्य लगा दे।

बिजाईकरने के पश्चात नेट हाउस के किनारों पर मिट्टी से अच्छी प्रकार दबा दे ताकि किसी भी प्रकार का कीट नेट हाउस में प्रवेश न हो सके। समय समय पर इस की निगरानी करते रहें आलू बीज उत्पादन तकनीक अनुसार संस्तुत की गयी कृषि क्रियाओं जैसे सिंचाई, टॉप ड्रेसिंग, मिट्टी चढ़ाना, कीटनाशकों एवं फूफंदी नाशकों का छिड़काव करते रहे। फसल में रैगिंग का कार्य बिजाई से 20, 40 और 70 दिनों पर सावधानीपूर्वक करें। बिजाई के 90-100 दिन पश्चात लॉक की कटाई कर दें एवं 15-20 दिनों पश्चात खुदाई का कार्य करे।

खुदाई किये गये आलूओं को किसी छायादार स्थान पर ढेर लगा दे तथा ढेर को धान की पुआल या गनी बैग से निर्मित तिरपाल अथवा चटाई से ढक दे साथ ही छँटाई करके बीज उपचार कर बोरो में पैक करके लेबुल लगाकर किसी नजदीकी बीज़ के शीतगृह में 15 मार्च से पूर्व भण्डारित कर लेना चाहिए ।

नेट हाउस के अंदर एवं खेत में बीज उत्पादन की प्रणाली प्रजनक बीज – 1.25 कुंतल 260 वर्ग मीटर नेट हाउस के अंदर विजाई

  • – प्रथम वर्ष
  • खेत में प्रथम बार गुणन 7.5 कुतंल बीज को 0.15 हेक्टर में बिजाई करके 6.25 कुतंल खेत में 1.25 कुंतल 260 वर्ग मीटर नेट हाउस के अंदर विजाई
  • – दूसरे वर्ष
  • खेत में दूसरी बार गुणन 36 कुंतल उत्पादन 0.94 हेक्टर में विजाई तीसरे वर्ष
  • खेत में तीसरी बार गुणन 216 कुंतल उत्पादन 5.4 हेक्टर में विजाई – चौथे वर्ष
  • खेत में चौथी बार गुणन 1296 कुंतल उत्पादन 32.4 हेक्टर में विजाई – पाँचवां वर्ष
  • इस प्रणाली के द्वारा उत्पादित 1296 कुंतल बीज आलू किसान भाई अपने आसपास के आलू उत्पादक किसानों को अच्छे गुणवत्ता युक्त बीज को बेच कर
  • लॉक काटने के 15 से 20 दिनों के बाद फसल की खुदाई कर लें खोदे गए आलू को का ढेर बनाकर तथा उसे धान की पुआल अथवा गनी बैग से बनी पल्ली से 15 से 20 दिनों तक ढक्कर रखें तथा प्रेडिंग करके 3% बोरिक एसिड (3 किग्रा दवा 100 लीटर पानी) के साथ घोल बनाकर उपचारित करके छाया में सुखाकर बोरो को शीतग्रह में रखें।

निष्कर्ष

कीट मुक्त नेट स्थापित करके किसान अपने स्वयं के लिए अच्छे गुणवत्ता वाले बीज प्राप्त करने का स्थायी स्रोत बना सकते हैं। 260 वर्ग मीटर का नेट प्रत्येक वर्ष 1.75 एकड़ से 25 एकड़ के लिए बीज का उत्पादन करने के लिए पर्याप्त है कीटमुक्त नेट हाउस विधि के साथ किसान अपने खेतों में अधिक उपज ले सकते हैं क्योंकि उनके पास अपना स्वयं का उच्च गुणवत्ता वाला बीज होगा। एक किसान अपने बीज को नेट हाउस में कई वर्षों तक उत्पादित कर सकता है, तक कि इसमें विषाणुओं के कोई लक्षण दिखाई न दें। साथ ही इससे किसानों की सरकारी संस्थाओं से बीज प्राप्त करने की निर्भरता कम होगी। साथ ही वे अन्य किसानों को अच्छे गुणवत्ता वाले बीज पैदा कर उसको बेच कर आर्थिक लाभ कमा सकते हैं।

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आलू कौन की फसल है , रबी ,खरीफ एवं जायद में से ?

रबी

आलू की बुवाई कौन से महीने में होती है?

आलू की बुवाई अग्रिम करना हो तो सितम्बर माह के मध्य से बुवाई होती है और दूसरी अक्टूबर के मध्य से बुवाई होती है |

आलू की फसल कितने दिन में तैयार हो जाती है?

आलू की फसल अनुमानित 60 से 90 दिन में तैयार हो जाती है परन्तु इनके किस्मो के आधार इनका तैयार होने का समय तय होता है |

आलू में कितने दिन में पानी देना चाहिए?

जब आलू में अंकुर आ जाये तो उसके लगभग 14 से 15 दिन के बाद सिचाई करना चाहिए |

आलू उगाने में कितना समय लगता है?

लगभग 90 दिन में

एक बीघा में आलू कितना होता है?

आलू की खेती में लगभग की किसान भाई पैदावार कम से कम 70 से 75 कुंतल कर लेते है |

आलू की खेती में कितना खर्चा आता है?

आलू की खेती करने में लगभग प्रति एकड़ 40 से 42 लाख रूपये का खर्च आता है |

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