अन्न भण्डारण के प्रमुख कीट एवं बचाव हेतु सावधानियाँ

भण्डारण के प्रमुख कीट कीट रोग, खरपतवार चूहों आदि से लगभग 15-20 प्रतिशत की क्षति होती है जिसमें 33 प्रतिशत खरपतवारों, 26 प्रतिशत फसलों के रोगों, 20 प्रतिशत फसलों के कीटों, 7 प्रतिशत भण्डारण के कीटों, 6 प्रतिशत चूहों तथा 8 प्रतिशत अन्य कारक सम्मिलित है। इस प्रकार भण्डारण के कीट, चूहों, नमी एवं फफूँदी द्वारा लगभग कुल क्षति का 20 प्रतिशत आंकलन किया गया है। इस क्षति के अतिरिक्त जमाव क्षमता, पौष्टिकता एवं मूल्य में कमी हो जाती है तथा ऐसा अन्न खाने से स्वास्थ्य पर भी बुरा प्रभाव पड़ता है। यदि किसान भाई अन्न के भण्डारण के समय सावधानियों बरते तो इस क्षति को बचा सकते हैं।

अन्न भण्डारण के प्रमुख कीट:

चावल का घुन या सूँड़ वाली सुरसरी, लेसर ग्रेन बोरर या छोटी सुरसरी, खपरा विटिल या पई, भारतीय मैदा पतंगा, लाल आटा भृंग, अनाज पतंगा, राइस माथ या चावल का पतंगा एवं पल्स विटिल या ढोरा आदि भण्डारण के प्रमुख कीट हैं।

भण्डारण के प्रमुख चूहे :

चूहों में मुख्य रूप से घरेलू चूहा एवं छोटी चुहिया भण्डारित अनाज को क्षति पहुँचाते हैं। चूहा अपने वजन के अनुरूप 10-60 ग्राम तक अनाज प्रतिदिन खाता है तथा उसका 10 गुना बर्बाद करता है।

भण्डारण में कीटों के प्रकोप के प्रमुख कारक :

1.नमी: भण्डारित अन्न में यदि 10 प्रतिशत से अधिक नमी होती है तो कीटों की संख्या बढ़ने लगती है तथा अनाज में फफूँदी भी तेजी से बढ़ती है, जिससे अनाज में जमाव क्षमता कम हो जाती है और स्वास्थ्य के लिए हानिकारक भी होता है ।

2.आक्सीजन की उपलब्धता : यदि भण्डारण कक्ष या पात्र में पर्याप्त आक्सीजन उपलब्ध है तो कीटों की संख्या बहुत तेजी से बढ़ती है।

3.तापक्रम : कीटों के बढ़वार एवं विकास के लिए 27 +1 डिग्री सेन्टीग्रेट तापक्रम उपयुक्त होता है । भण्डारण कक्ष में उपयुक्त तापक्रम बनाये रखने के लिए कीट हीट स्पाट विकसित करते है ।

कीटों के भण्डारण कक्ष में पहुँचने के स्रोत :

1. खेत द्वारा: सूंड़ वाली सुरसरी, छोटा पतंगा एवं पल्स बीटिल या ढ़ोरा खेत में खड़ी फसल के दानों पर अण्डा दे देती है जो किसान के बिना जानकारी के विभिन्न अवस्थाओं में भण्डारण कक्ष में आ जाते हैं।

2.मड़ाई के स्थान द्वारा : कुछ कीट थ्रेसिंग फ्लोर पर पहले से ही उपलब्ध रहते हैं जो मड़ाई के समय अनाज के साथ भण्डारण कक्ष में आ जाते हैं ।

3.ढ़ोने वाले साधन द्वारा : कुछ कीट ढ़ोने वाले साधन जैसे ट्रैक्टर ट्राली, बैलगाड़ी आदि में पहले से छिपें रहते हैं जो अनाज के साथ भण्डारण कक्ष में आ जाते हैं।

4. पुराने बोरों द्वारा: कुछ कीट पुराने बोरों में पहले से ही छिपें रहते हैं जो बोरों में अनाज के साथ भण्डारण कक्ष में आ जाते हैं।

5.पुराने भण्डारण: कक्ष द्वारा कुछ कीट भण्डारण कक्ष में पहले से छिपे रहते हैं जो अन्न भण्डारण के समय अनाज में आ जाते हैं ।

अन्न भण्डारण में सावधानियाँ :

1. जिस गोदाम, कुठला भण्डारण गृह में भण्डारण करना है उसकी भली प्रकार सफाई एवं मरम्मत करा लेना चाहिए। दरार या बिल आदि पूरी तरह सीमेंट से बन्द कर देना चाहिए, जिससे चूहे, कीट या नमी का प्रवेश न हो ।

2.भण्डारण से पूर्व भण्डार गृह, कुठला, बखारी आदि को मैलाथियान 50 प्रतिशत ई0सी0 को 1:100 के अनुपात में घोल बनाकर 3 लीटर / 100 वर्ग मीटर की दर से फर्श, दीवाल एवं छत पर छिड़काव कर देने से छिपे हुए कीट मर जाते हैं।

3.पुराने बोरों को कड़ी धूप में सुखाने या मैलाथियान 50 प्रतिशत ई0सी0 के 1:100 अनुपात घोल में 10 मिनट भिगोने से बोरों में छिपे हुए कीट मर जाते हैं।

4.अनाज को अच्छी प्रकार धूप में सुखा लेना चाहिए जिससे दानों में 10 प्रतिशत से अधिक नमी न रह जाए। धूप में सुखाने के पश्चात ठण्डा करके ही भण्डारण पात्रों आदि में रखना चाहिए।

5.यदि भण्डारण कक्ष/ गोदाम में भण्डारण कराना है तो फर्श पर 2.5 फिट मोटी साफ, सूखा एवं नये भूसे की तह लगाकर बोरों की छल्ली दीवाल से 2.5 फिट की दूरी पर लगाना चाहिए, जिससे गोदाम में नमी से बचत होगी ।

6.यदि भण्डारण कक्ष में बोरियों में भण्डारण कराना हो तो छत की पूरी ऊँचाई का 1 / 5 भाग छोड़कर ही बोरियों की छल्ली लगाना चाहिए तथा कीटों से सुरक्षा की दृष्टि से एल्यूमिनियम फास्फाइड पाउडर पाउच 56 प्रतिशत 10 ग्राम पैकिंग का 150 ग्राम / 100 घन मीटर या एल्यूमिनियम फास्फाइड 15 प्रतिशत 12 ग्राम पैकिंग का 600 ग्राम / 100 घन मीटर की दर से बोरियों के बीच रख देते है तथा भण्डारण कक्ष को अच्छी तरह से बन्द कर वायुरोधी कर देना चाहिए । एल्यूमिनियम फास्फाइड पाउडर पाउच 56 प्रतिशत के पैकेट को किनारे से काटकर अन्दर के पाउच को निकाल कर वैसे ही बोरियों के बीच एल्यूमिनियम फास्फाइड 15 प्रतिशत टैबलेट को कपड़े में लपेट कर रखना चाहिए।

7.यदि अनाज का भण्डारण कुठलों या बखारी में करना है तो एल्यूमिनियम फास्फाइड पाउडर पाउच 56 प्रतिशत 10 ग्राम पैकिंग का 1 पाउच या एल्यूमिनियम फास्फाइड 15 प्रतिशत 12 ग्राम पैकिंग का 1 टैबलेट 1 मे0 टन अनाज में पूर्व में बताये गये तरीके के अनुसार अनाज के बीच में रखकर कुठला या बखारी को पूरी तरह से वायुरोधी कर देना चाहिए। इस प्रकार भण्डारण करने के 1 सप्ताह से पूर्व भण्डारण कक्ष नहीं खोलना चाहिए।

8.भण्डारण पात्रों के पेंदी पर बीच-बीच में एवं अनाज के साथ नीम की सूखी पत्तियाँ रखने पर कीट का प्रकोप नहीं होता है। अनाज को बखारी या बोरों में भण्डारित करने से पूर्व नीम सीड करनाल पाउडर 1 किग्रा./ कुन्तल अनाज की दर से मिला देने पर कीट प्रकोप नहीं होता है।

9.दलहनी अनाज को भण्डारण से पूर्व सरसों या अलसी का तेल 5 मिली0 / किलोग्राम की दर से मिला लेने पर ढ़ोरा का प्रकोप नहीं होता है।

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