बोरोधान की खेती कैसे करें: जलभराव वाले क्षेत्र में

आज हम अपने ब्लॉग में बोरोधान की खेती के बारे में बताएँगे जैसे – बोरोधान की उपज, बोरोधान की खेती कैसे करें, बोरोधान की खेती की जानकारी, बोरोधान की खेती के नियम, बोरोधान की खेती के टिप्स, बोरोधान उत्पादन, बोरोधान की खेती के बीज, बोरोधान की उन्नत खेती, आदि बिषयो पर चर्चा करेंगे |

बोरोधान की खेती का परिचय

बोरोधान एक एशियाई अनाज है जो उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में बहुत लोकप्रिय है। इस लेख में आप बोरोधन के उपयोग, फायदे और नुकसान से सम्बंधित सम्पूर्ण जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।

निचले बरसाती क्षेत्र में सामान्य रूप से खरीफ एवं रबी की फसले के लिए उपयोगी नहीं होती है | इस तरह के क्षेत्रो में 3200 हेक्टेयर पूर्वी और भारत के उत्तर प्रदेश के बलिया , गोरखपुर , देवरिया ,बस्ती, सिद्धार्थनगर ,वाराणसी, मिर्जापुर ,एवं इन जनपदों में अभी भी बोरोधान की खेती की जाती है और इस भूमि पर आज भी समुचित सश्य प्रबंधन प्रभावी और अधिक उपजाऊ प्रजातियां जिससे कृषको को लाभकारी प्रोत्साहन के कमी होने से उत्पादकता बहुत कम हो पति है | इसलिए बोरोधान की प्रजातियां उपलब्ध होने और जानकारी होने के बाद लोगो ने (जाना की बोरोधान की उत्पादकता ज्यादा हो सकती है )जिसके साथ में इसमें प्रचुर मात्रा में नमी पायी जाती है ,बोरोधन की खेती में रोग उनके उत्पाद को लगभग 40 तक कम कर देता है | जिससे जलभराव वाले क्षेत्र के किसान भाई को ज्यादा उत्पादन से लाभ होता है और चेहरे पर ख़ुशी नजर आती है |

बोरोधन लगकर किसान अपना समय का सही उपयोग करने के बाद अच्छा उपज प्राप्त करता है | इस समय बोरोधन की खेती के प्रजाति कुछ इसप्रकार है जैसे – साकेत -4 , सरजू-52 , जया, आई आर-8 , आदि है |

बोरोधान की सन्तुत अधिक उपजाऊ प्रजातियां

क्र.स.प्रजाति का नामअधिसूचना का वर्षअवधि दिनों मेंउपज क्षमता कुंतल /हेक्टेयर
1प्रभात197816050-60
2नरेंद्र -97199214535-45
3धनलक्ष्मी199217045-55
4गौतम199617560-70
5बरानी दीप200614030-40
6रिछारिया200616035-45
7सरोज200617055-65
8मालवीय धान -1052009150-15565-70
9आई आर -64 . डी आर टी -12015-2020145-15060-65

उपयोगी भूमि (khet)

उपयुक्त भूमि : बारिश में बहुत ज्यादा जल के कारन तालाब और झील के आस पास वाले क्षेत्र जल भरा रह जाता है जिसके कारण वहाँ का तापमान घटकर 30 डिग्री सेल्सियस अधिकतम रह पता है | जब आपको कही जल का भराव या ठहराव अधिक होता है तो वहाँ बोरोधन के लिए भूमि उपयुक्त मानी जाती है |

बोरोधान से सम्बंधित कुछ अन्य महत्वपूर्ण जानकारी निम्न है –
बीज दर :-40 – से 45 kg बीज /हेक्टेयर के अनुमान से पौध लगाना चाहिए |

पौध डालने का सही समय : बोरोधन की खेती के लिए पौध डालने का सही समय अक्टूबर 15 से नोवेम्बर 15 तक होता है |
रोपाई का सही समय :-कम से कम एक महीना से ज्यादा और 2 महीने से कम का समय देना चाहिए , जिससे बोरोधन की अधिक उपज प्राप्त होने की संभावना बढ़ जाती है |
पौध प्रबंधन : विधि निम्न है –

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१.बोरोधान के लिए पौध की रोपाई (ropayi) किये जाने का क्षेत्र(Area) के पास का तराई क्षेत्र हो जहा पानी की सुविधा हो |
२.पौध की खेत में हम 1 से 1 .5 kg साड़ी गोबर या कम्पोस्ट खाद का उपयोग प्रति वर्ग मीटर करेंगे |
३.एक हेक्टेयर की रोपाई के लिए पौध क्षेत्रफल 1 /10 हेक्टेयर में 25 kg ,यूरिया, 25 kg और सिंगल सुपर फास्फेट , २ kg जिंक सल्फेट एवं २० kg म्यूरेटऑफ़ पोटास का पौध लगाने के समय उपयोग करना चाहिए |
४. २ ग्राम प्रति किलो ग्राम की बीज दर से बीज शोधन में कार्बेंडाजिम का उपयोग करना चाहिए |
५. 90 से 100 ग्राम प्रति वर्ग मीटर अंकुरित बीज की बुवाई करना चाहिए |
६. बुवाई के Perday सिचाई कुछ इस प्रकार करे की भूमि (kheti) में नमी उपयोगी में बानी रहे |

बोरो धान की बीज दर की मात्रा

बोरोधन में लगभग 40-45 kg / हेक्टेअर की दर से लगाना चाहिए ।

बोरो धान की खेती में पौध डालने का उचित समय

बोरो धान की खेती में पौध डालने का उचित समय अक्टूबर से नवंबर के मध्य माना जाता है।

बोरोधन की रोपाई का सही समय

बोरोधन की रोपाई का सही समय यह होता है की 35 से 40 दिन में पौधों की रोपाई कर देनी चाहिए जिससे अच्छी मात्रा में फसल उत्पाद हो |

हम पौधों को ठंडक से बचने का कुछ उपाय


1.पौध की सिचाई नियमित रूप से करते रहना चाहिए
2.पुआल , गोबर की राख, लकड़ी का छिड़काव Week में दो बार करना चाहिए |
3.प्रातः पत्तियों पर सारी ओस को गिरने देते रहना चाहिए
4.रात होने से पहले प्लास्टिक सीट से रख ढक देना और प्रातः सुबह हटा लेना चाहिए |
5.खेत के आस पास धुवा करके भी खेती को ठंड से बचा सकते है |

बोरोधान की कटाई एवं मड़ाई –

जब कटाई का समय आये तो इसके बाली को पूरा सूखने के पहले इसके कटाई सुरु कर देनी चाहिए |

उपज :

बोरोधान की उन्नत शील प्रजाति एक अच्छा उपज देने में सक्षम होती है |

भण्डारण

बोरोधान का भण्डारण किसी भी बर्तन या ड्रम में रख सकते है | इसको कमरे के दीवाल से दूर रहना चाहिए |

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बोरो की खेती कब की जाती है?

पौध डालने का सही समय : बोरोधन की खेती के लिए पौध डालने का सही समय अक्टूबर 15 से नोवेम्बर 15 तक होता है |
रोपाई का सही समय :-कम से कम एक महीना से ज्यादा और 2 महीने से कम का समय देना चाहिए , जिससे बोरोधन की अधिक उपज प्राप्त होने की संभावना बढ़ जाती है |

बोरो धान क्या है?

बोरोधान एक प्रकार का धान है जो की जल भराव वाले क्षेत्र में जैसे -झील , नदी का किनारा , तालाब के आस पास के क्षेत्र में इसकी खेती बिना कोई समस्या के की जा सकती है जहां दूसरे धान आसानी से अच्छी उपज नहीं दे पाएंगे वही बोरोधान की खेती करने से अच्छी उपज मिल सकती है |

1 एकड़ में कितना धान उगाया जा सकता है?

1 एकड़ में किसान भाइयो की मेहनत और बीज के किस्म के ऊपर बात होती है फिर भी एक एकड़ में लगभग 23 से 24 कुंतल धान की खेती की जा सकती है |

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