चन्दन की खेती की जानकारी 2023

प्रस्तावना:

भारत एक धरोहरी देश है, जो अपने प्राचीन समृद्ध संस्कृति और प्रकृति की सुंदरता के लिए जाना जाता है। इसके विभिन्न भू-भाग और जलवायु ने उत्तर से दक्षिण और पूर्व से पश्चिम तक विभिन्न प्रकार के पौधों और फसलों की खेती को संभव बनाया है। चन्दन, भारतीय धरोहर में से एक है, जो अपने सुगंधित लकड़ी के लिए अखंड प्रसिद्ध है। चन्दन की खेती एक लाभदायक और सामर्थ्यपूर्ण व्यवसायिक विकल्प है, और इसमें उन्नति के बहुत से साधन हैं। इस लेख में, हम चन्दन की खेती की जानकारी प्रदान करेंगे, जो किसानों और उन्नति के इच्छुक लोगों को उन्नति और अधिकारी उत्पादन की दिशा में मदद करेगी।

चन्दन की खेती का परिचय

चन्दन, विज्ञानिक रूप से “संदलम” वृक्ष के लकड़ी से प्राप्त होता है, जो खास रूप से उसकी सुगंधित खुशबू के लिए प्रसिद्ध है। चन्दन का वैज्ञानिक नाम “सैंडलवुड” है और यह वृक्ष साधारण रूप से भारत, ऑस्ट्रेलिया, इंडोनेशिया, दक्षिण भारतीय द्वीपसमूह और दक्षिण पूर्व एशिया के उष्ण और उपष्ण क्षेत्रों में पाया जाता है। यह एक छोटे से मध्यम आकार का वृक्ष है जिसकी ऊँचाई लगभग 20 मीटर तक होती है।

चन्दन की लकड़ी एक मूल्यवान वस्त्र धारक है, जो इसे विभिन्न धार्मिक और आर्थिक उद्दीपन के लिए प्रयोग करते हैं। वैदिक संस्कृति से लेकर आधुनिक युग तक, चन्दन का उपयोग पूजा विधि, धार्मिक अनुष्ठान, आरोग्य, और चिकित्सा में किया जाता रहा है। यह अनुभूति और शांति के लिए एक धार्मिक प्रतीक के रूप में महत्वपूर्ण है।

चन्दन की खेती के लाभ:

चन्दन की खेती विभिन्न आर्थिक, पर्यावरणीय और सामाजिक लाभों के साथ आती है। इसमें कुछ महत्वपूर्ण लाभ निम्नलिखित हैं:

1. आर्थिक लाभ: चन्दन की खेती एक लाभदायक व्यवसायिक विकल्प है,

जो किसानों को आर्थिक रूप से सुरक्षित करता है। चन्दन की लकड़ी का मूल्य मार्केट में उच्च होता है, जिससे उत्पादकों को अधिक मुनाफा होता है।

2. पर्यावरणीय लाभ: चन्दन की खेती पर्यावरण को भी लाभ पहुंचाती है। चन्दन का पौधा जलवायु से सहजता से सहन करता है और जल के उपयोग में अधिक संयोज्य होता है। इससे पर्यावरण को बचाने और प्राकृतिक संतुलन को बनाए रखने में मदद मिलती है।

3. सामाजिक लाभ: चन्दन की खेती से स्थानीय समुदाय को रोजगार का अवसर मिलता है। किसानों और चन्दन उत्पादकों के माध्यम से लोग आर्थिक रूप से स्वावलंबी बन सकते हैं, जो सामाजिक विकास के लिए गुणवत्ता भरी जिम्मेदारी है।

चन्दन की खेती की विभिन्न प्रकार

चन्दन की खेती कई विभिन्न प्रकार से की जाती है, जिनमें से कुछ महत्वपूर्ण प्रकार निम्नलिखित हैं:

1. लाल चन्दन (रेड सैंडलवुड): लाल चन्दन का वैज्ञानिक नाम “प्टेरोकार्पस एंथेमिका” है। यह चन्दन के मध्यम आकार का वृक्ष है और उत्तरी और पूर्वी भारत में पाया जाता है। इसकी लकड़ी रंगीनता और सुगंध के लिए प्रसिद्ध है। लाल चन्दन की खेती भारत में विभिन्न राज्यों में की जाती है और इसका उपयोग वैदिक पौराणिक अनुष्ठान और पूजा-अर्चना में होता है।

2. सफेद चन्दन (व्हाइट सैंडलवुड): सफेद चन्दन का वैज्ञानिक नाम “सैंडलवुड एल्बा” है और यह वृक्ष भारत, इंडोनेशिया, और एशिया के दक्षिण पूर्वी भाग में पाया जाता है। इसकी लकड़ी सफेद रंग की होती है और यह बहुत ही सुंदर दिखता है। सफेद चन्दन की खेती विशेष रूप से विभिन्न प्रतिष्ठानों के उद्दीपन उद्देश्यों के लिए होती है।

3. सांभर चन्दन (ब्लैक सैंडलवुड): सांभर चन्दन का वैज्ञानिक नाम “एचटीआईओसीएलम आरुंडिनेस” है और यह वृक्ष भारतीय उपमहाद्वीप में पाया जाता है। इसकी लकड़ी काली और सफेद

रंग की होती है और यह चन्दन की अन्य प्रजातियों की तुलना में अधिक दुर्दर्श और सुगंधित होती है। सांभर चन्दन की खेती वैदिक संस्कृति में महत्वपूर्ण है और यह पूजा और आर्चना में उपयोग के लिए प्रयोग किया जाता है।

4. रोज़ सैंडलवुड (सदाबहार सैंडलवुड): रोज़ सैंडलवुड का वैज्ञानिक नाम “इंडियन रोज़वुड” है और यह वृक्ष भारत में पाया जाता है। यह वृक्ष बहुत ही सुंदर और आकर्षक होता है और इसकी लकड़ी का उपयोग विभिन्न धार्मिक अनुष्ठानों और उत्सवों में होता है।

चन्दन की खेती के लिए उपयुक्त भूमि और जलवायु:

चन्दन की खेती के लिए उपयुक्त भूमि और जलवायु विशेष महत्वपूर्ण हैं। यह पौधा विशेष रूप से उष्ण और उपष्ण क्षेत्रों में अच्छे से विकसित होता है, जिसमें उच्च तापमान और उच्च आर्द्रता होती है। चन्दन की खेती के लिए निम्नलिखित जलवायु और भूमि उपयुक्त होती है:

1. जलवायु: चन्दन की खेती के लिए शुष्क और उष्ण जलवायु सबसे अधिक उपयुक्त होती है। यह वृक्ष जल की आपूर्ति के लिए प्राकृतिक तौर पर सहनशील होता है और जलवायु में बदलाव के उपयुक्त नहीं होता है।

2. भूमि: चन्दन की खेती के लिए धातु युक्त और रेतीली भूमि उपयुक्त होती है। यह वृक्ष धातु युक्त मिट्टी में भी अच्छे से विकसित होता है, लेकिन पानी भरे स्थानों में नहीं उगता। सुन्दर चन्दन की लकड़ी के लिए उपयुक्त भूमि में पहाड़ी क्षेत्र और तालाब के पास भूमि शामिल होती है।

3. जल आपूर्ति: चन्दन की खेती के लिए प्राकृतिक जल आपूर्ति उपलब्ध होना आवश्यक है। यदि उच्च तापमान और अधिक आर्द्रता की जलवायु में प्राकृतिक जल आपूर्ति नहीं होती है, तो सिंथेटिक जल आपूर्ति का उपयोग किया जा सकता है।

चन्दन की खेती की विधि:

चन्दन की खेती के लिए निम्नलिखित कदम आवश्यक होते हैं:

1. बीज उगाने की जगह का चयन: चन्दन की खेती के लिए उचित भूमि का चयन करना महत्वपूर्ण है। उच्च तापमान और उच्च आर्द्रता वाले स्थानों का चयन करना उचित होता है, जिससे चन्दन के पौधे अच्छे से विकसित हो सकें। बीज उगाने के पहले भूमि को अच्छे से उगलकर साफ करें।

2. बीज उगाने की विधि: चन्दन के बीजों को उपयुक्त दूरी और गहराई में उगाने की विधि अनुसरण करें। बीजों को समृद्ध मिट्टी में गहराई में बोएं और उन्हें हल्के हाथों से मिट्टी से ढक दें। ध्यान रखें कि बीजों को एक दूसरे से पर्याप्त दूरी पर रखें ताकि पौधे अच्छे से विकसित हो सकें।

3. समय सारिणी: चन्दन की खेती के लिए सही समय सारिणी चुनना महत्वपूर्ण है। चन्दन के पौधों को उगाने का सबसे उचित समय मार्च या अप्रैल होता है, जिससे उन्हें पूर्णतया विकसित होने में मदद मिलती है।

4. पानी देना: चन्दन की खेती में नियमित और पर्याप्त पानी का प्रदान करना महत्वपूर्ण है। पौधों को सुबह और शाम को पानी देना उचित होता है, जिससे उनकी आर्द्रता बनी रहे।

5. कीटनाशकों का उपयोग: कीटनाशकों का उचित रूप से उपयोग करना चन्दन की खेती में महत्वपूर्ण है। कीटनाशकों से चन्दन पौधों को कीटों और रोगों से बचाने में मदद मिलती है।

चन्दन की खेती के व्यापारिक पहलु:

चन्दन की खेती एक व्यापारिक विकल्प भी है, जिससे किसान और उत्पादक मुनाफा कमा सकते हैं। चन्दन की लकड़ी का मूल्य मार्केट में अधिक होता है, जिससे उत्पादकों को उच्च मुनाफा होता है। इसे विभिन्न धार्मिक और आर्थिक उद्दीपन के लिए उपयोग किया जाता है, जिससे इसका दर्शकों और उपभोक्ताओं में महत्व होता है।

चन्दन की खेती के व्यापारिक पहलु में निम्नलिखित बातें महत्वपूर्ण हैं:

1. बाजार अनुसंधान: चन्दन की खेती में व्यापार की शुरुआत से पहले बाजार का अनुसंधान करना महत्वपूर्ण है। विभिन्न बाजारों में चन्दन की मांग और लकड़ी का मूल्य अध्ययन करना उचित होता है।

2. उत्पाद के पैकेजिंग और प्रसारण: चन्दन की खेती से प्राप्त उत्पादों के पैकेजिंग और प्रसारण का ध्यान रखना महत्वपूर्ण है। उत्पादों को आकर्षक रूप से पैक करके उन्हें विभिन्न बाजारों में प्रसारित करना उचित होता है।

3. उत्पाद के प्रमोशन: चन्दन की खेती से प्राप्त उत्पादों का प्रमोशन करना उचित होता है। संबंधित व्यापारिक मंचों, वेबसाइटों, और सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्मों का उपयोग करके उत्पादों का प्रचार करना महत्वपूर्ण है।

4. उत्पाद की गुणवत्ता: चन्दन की खेती से प्राप्त उत्पादों की गुणवत्ता पर ध्यान देना महत्वपूर्ण है। उत्पादों की गुणवत्ता को सुनिश्चित करने के लिए उचित देखभाल और नियंत्रण व्यवस्था रखना उचित होता है।

चन्दन की खेती का लाइसेंस

चन्दन की खेती के लिए लाइसेंस एक महत्वपूर्ण प्रक्रिया है। यह लाइसेंस चन्दन की खेती को कानूनी रूप से स्वीकृति देता है और किसान को चन्दन पौधों को उगाने और उत्पादन करने की अनुमति प्रदान करता है। चन्दन की खेती के लिए लाइसेंस प्राप्त करने के लिए निम्नलिखित कदम अनुसरण किए जाने चाहिए:

1. कृषि विभाग से संपर्क करें: चन्दन की खेती के लिए लाइसेंस प्राप्त करने के लिए सबसे पहले किसान को अपने राज्य के कृषि विभाग से संपर्क करना होता है। कृषि विभाग चन्दन की खेती को प्रबंधित करने और लाइसेंस प्रदान करने के लिए उचित जानकारी और मार्गदर्शन प्रदान करता है।

2. आवश्यक दस्तावेज़ प्रस्तुत करें: लाइसेंस प्राप्त करने के लिए आवश्यक दस्तावेज़ों को पूरा करना आवश्यक होता है। यह दस्तावेज़ आम तौर पर किसान की पहचान प्रमाण, कृषि जमीन के स्वामित्व का प्रमाण, और खेती के लिए उपयुक्त भूमि के संबंध में होते हैं।

3. आवेदन पत्र भरें: कृषि विभाग के द्वारा प्रदान किए गए निर्देशों के अनुसार, किसान को चन्दन की खेती के लिए आवेदन पत्र भरना होता है। आवेदन पत्र में सभी आवश्यक जानकारी और दस्तावेज़ों की प्रमाणित प्रतियाँ सम्मिलित करने के लिए सुनिश्चित करना चाहिए।

4. लाइसेंस का प्राप्त होना: आवेदन पत्र सम्पूर्ण करने के बाद, कृषि विभाग द्वारा लाइसेंस का मूल्यांकन किया जाता है। जब लाइसेंस के आवश्यक मानकों को पूरा किया जाता है, तो किसान को चन्दन की खेती के लिए लाइसेंस प्रदान किया जाता है।

चन्दन की खेती की जानकारी के लिए लाइसेंस की प्राप्ति के बाद, किसान अपनी खेती को सफलतापूर्वक चला सकता है और चन्दन के पौधों से लाभान्वित हो सकता है। लाइसेंस के माध्यम से चन्दन की खेती को कानूनी रूप से संचालित करने से किसान को आर्थिक रूप से सुरक्षित होने के साथ-साथ सरकारी सहायता भी मिलती है।

चन्दन का पेड़ कहा मिलेगा

Chandan Ka Ped

चन्दन का पेड़ भारत में विभिन्न क्षेत्रों में पाया जाता है। चन्दन का पेड़ विशेष रूप से निम्नलिखित स्थानों में मिलता है:

1. हिमाचल प्रदेश: हिमाचल प्रदेश में चन्दन के पेड़ पाये जाते हैं। यहां के पर्वतीय इलाकों में चन्दन की खेती और उत्पादन की जाती है।

2. उत्तराखंड: उत्तराखंड के अल्मोड़ा और पिथौरागढ़ जिले में चन्दन के पेड़ पाये जाते हैं। यहां के कुछ क्षेत्रों में चन्दन की खेती भी होती है।

3. राजस्थान: राजस्थान के जोधपुर, बारमेर, और सीकर जिले में भी चन्दन के पेड़ पाये जाते हैं। यहां के रेगिस्तानी क्षेत्रों में चन्दन की खेती की जाती है।

4. महाराष्ट्र: महाराष्ट्र के कोंकण और गोवा जिले में भी चन्दन के पेड़ पाये जाते हैं। यहां पर्वतीय क्षेत्रों में चन्दन की खेती की जाती है।

5. केरल: केरल के मलबार इलाके में चन्दन के पेड़ पाये जाते हैं। यहां चन्दन के पेड़ों का उत्पादन होता है।

यहां तक ​​कि चन्दन का पेड़ कुछ और भारतीय राज्यों में भी पाया जा सकता है, लेकिन उपरोक्त स्थान हैं जहां यह विशेष रूप से प्राकृतिक रूप से पाया जाता है और चन्दन की खेती की जाती है। चन्दन के पेड़ की खेती इन क्षेत्रों में अर्थात् प्राकृतिक रूप से होने से इसके प्राकृतिक गुणों का भी लाभ होता है।

चन्दन के पेड़ की नर्सरी

चन्दन के पेड़ की नर्सरी एक ऐसी स्थान है जहां पर्यावरण में चन्दन के पेड़ के पौधे उगाए और उन्हें विकसित किया जाता है। यह विशेष रूप से किसानों और व्यक्तियों को चन्दन के पेड़ के पौधों के विक्रय और खेती में सहायता प्रदान करने के लिए उपयुक्त होती है।

चन्दन के पेड़ की नर्सरी में निम्नलिखित कार्य होते हैं:

1. पौधों के उगावट: चन्दन के पेड़ की नर्सरी में छोटे पॉट्स या पॉटलिंग मीडियम में चन्दन के पेड़ के बीज या सप्लाई किये गए पौधे को उगावट किया जाता है।

2. पानी और खाद का प्रबंधन: नर्सरी में पौधों को उगाने के लिए उचित पानी और खाद का प्रबंधन किया जाता है ताकि पौधे अच्छे से विकसित हो सकें।

3. बीमारियों और कीटाणु का नियंत्रण: चन्दन के पेड़ की नर्सरी में पौधे को बीमारियों और कीटाणु से बचाने के लिए उचित नियंत्रण की जाती है।

4. उचित संरचना: चन्दन के पेड़ की नर्सरी में उचित संरचना का ध्यान रखा जाता है ताकि पौधे को उचित दिखावट मिल सके और उनका विक्रय कार्य सुगम रहे।

5. उचित देखभाल: नर्सरी में पौधों को उचित देखभाल और नियंत्रण के साथ विकसित किया जाता है ताकि वे समय पर खेती के उद्देश्य के लिए तैयार हो सकें।

चन्दन के पेड़ की नर्सरी व्यक्तियों को चन्दन की खेती के लिए उचित और सुसंगत पौधों की आपूर्ति करती है और इससे चन्दन के पेड़ की उत्पादन और खेती को बढ़ावा मिलता है। चन्दन के पेड़ की नर्सरी व्यक्तियों को विक्रेताओं, किसानों, और पौधों के प्रेमियों के बीच एक महत्वपूर्ण रोल निभाती है।

चन्दन के पेड़ पर सांप

चन्दन के पेड़ पर सांप के बारे में बात करते हुए यह जरूरी है कि हम ध्यान दें कि यह एक सामान्य वस्तुओं और प्राकृतिक वातावरण में होने वाली घटना है और इसे उचित समझे।

चन्दन के पेड़ पर सांप का पाया जाना सामान्य बात है। चन्दन के पेड़ के नीचे सांप आराम से धरती पर घूमते हुए देखे जाते हैं। ये सांप अक्सर चन्दन के पेड़ के छाया वाले स्थानों या नीचे छिपे हुए स्थानों में आराम से बिताना पसंद करते हैं।

सांप के पास चन्दन के पेड़ों के पास रहने के कई कारण हो सकते हैं। उनमें से कुछ मुख्य कारण निम्नलिखित हैं:

1. चन्दन के पेड़ पर उपयोगी छिपाव: चन्दन के पेड़ के नीचे उपयुक्त छिपाव उपलब्ध होता है जो सांपों को आरामदायक अंग विश्राम करने की अनुमति देता है।

2. भोजन के लिए: सांप अक्सर चन्दन के पेड़ के आस-पास अपने शिकार का पीछा करते हैं जैसे कि छोटे जानवर या छोटी पक्षियों को जिन्हें वे अपने भोजन के रूप में चुनते हैं।

3. शीतलता के लिए: चन्दन के पेड़ की शादियों और छायादार स्थानों में सांप शीतलता और ठंड भरने के लिए जाते हैं।

4. विश्राम के लिए: सांप अक्सर दिन के गर्मी से बचने के लिए चन्दन के पेड़ के नीचे विश्राम करते हैं।

यदि हम चन्दन के पेड़ के नजदीक सांप को देखते हैं, तो हमें उन्हें भयानक या हानिकारक न मानकर उचित रूप से व्यवहार करना चाहिए। सांपों के साथ संतुलित संबंध रखना और उन्हें अनुभव करना वन्यजीवीयों के संरक्षण के लिए महत्वपूर्ण है। चाहे वह चन्दन के पेड़ हों या किसी अन्य पेड़ पर सांपों को समझते हुए हमें उनके साथ सहयोगी बनना चाहिए और सुरक्षित तरीके से उन्हें आस-पास का प्राकृतिक वातावरण बचाने में मदद करनी चाहिए।

chandan ka ped kitne din me taiyar hota hai

चंदन का पेड़ तैयार होने में एक व्यक्ति के उपार्जन क्षमता और वातावरण के अनुसार भिन्न-भिन्न समय लग सकता है।

सामान्यतः, चंदन का पेड़ तैयार होने में लगभग 5 से 7 वर्षों का समय लगता है। पूर्ण पकाने के लिए चंदन के पेड़ को उचित देखभाल, समय-समय पर सिंचाई, खाद की उपयोग, और कीटाणु-रोग नियंत्रण की आवश्यकता होती है। चंदन के पेड़ की लगाने वाली तारीख से लेकर उसके उगाने और पकाने की विधि तक कई चरण होते हैं।

चंदन के पेड़ के विकास में कुछ प्रमुख चरण हैं:

1. बीज से उगाई: चंदन के बीज का रोपण करने के बाद, पहले कुछ महीनों में पौधे का उगावट होता है। इस समय में पौधे को अच्छे से सिंचाई और खाद का उपयोग करना चाहिए।

2. रोपण के बाद का विकास: बीज रोपण के बाद, चंदन का पेड़ धीरे-धीरे विकसित होता है। इस समय में पौधे को नियमित रूप से देखभाल करना चाहिए और उचित दिखावट देना चाहिए।

3. पकाने की विधि: चंदन के पेड़ के पकाने का समय प्रमुख रूप से उसके आकार और विकसित तथा धातु-परिमाण पर निर्भर करता है। कुछ प्रकार के चंदन पेड़ छोटे आकार के होते हैं जिनका पकाना कुछ ही समय लगता है, जबकि कुछ बड़े चंदन पेड़ के पकाने में कई वर्ष लग सकते हैं।

इसलिए, चंदन के पेड़ की पूर्ण तैयारी और पकाने में कुछ समय लग सकता है, लेकिन यह व्यक्ति के धैर्य, समय और पौधे की देखभाल पर निर्भर करता है।

चन्दन का पेड़ कैसे लगाये

चन्दन का पेड़ लगाने की प्रक्रिया निम्नलिखित आसान चरणों में की जा सकती है:

1. बीज चयन: चन्दन के पेड़ को उगाने के लिए उचित और स्वस्थ बीजों का चयन करें। बाजार में उचित प्रकार के चन्दन के बीज मिलते हैं। आपके जल्दबाज़ी में न जाएं, और केवल प्राकृतिक तरीके से उगे हुए बीजों का चयन करें।

2. उचित स्थान का चयन: चन्दन के पेड़ को उगाने के लिए एक उचित स्थान का चयन करें जो धूप और आच्छादन को प्राप्त कर सकता है। चन्दन के पेड़ को आस-पास की भूमि से दूरी रखने का प्रयास करें ताकि उसकी गहरी जड़ें विकसित हो सकें।

3. खेती की भूमि की तैयारी: चन्दन के पेड़ के उगाने के लिए भूमि की तैयारी करें। भूमि को उचित रूप से खुरदर बनाएं और उसमें खाद और गोबर का उपयोग करें।

4. बीज रोपण: खेती की भूमि में चन्दन के बीज रोपें। बीजों को धीरे-धीरे गहराई करते हुए रोपें और उन्हें धानी धराने के लिए धक्के दें।

5. सिंचाई और देखभाल: चन्दन के बीज रोपने के बाद, पौधे को नियमित रूप से सिंचाई करें और उचित देखभाल करें। प्राकृतिक खाद और खेती से संबंधित तकनीकों का उपयोग करें।

6. समय-समय पर छायादार स्थान प्रदान करें: चन्दन के पेड़ के उगाने के लिए उसे समय-समय पर छायादार स्थान प्रदान करना महत्वपूर्ण है, विशेष रूप से गर्मियों में।

7. धैर्य रखें: चन्दन के पेड़ को उगाने में समय लग सकता है, इसलिए इस कार्य को धैर्य से करें और नियमित देखभाल करें।

हाइब्रिड मूली की खेती: उच्च उत्पादकता और स्वास्थ्यकर्मी खेती प्रक्रिया

इन सरल चरणों के माध्यम से आप चंदन के पेड़ को उगा सकते हैं और इसके लाभों का आनंद उठा सकते हैं। चन्दन के पेड़ को उगाने से पहले अपने स्थानीय कृषि विशेषज्ञों से सलाह लेना फायदेमंद साबित होगा।

Samuhik Krishi Kya Hai : Ek Samarthan Samriddhi ki Adbhut Pahal 2023

लौकी और करेले की खेती-एक हज़ार प्लांट्स,1-लाख रुपए तक कमाई!

Conclusion

चन्दन की खेती एक लाभदायक और सामर्थ्यपूर्ण व्यवसायिक विकल्प है, जो विभिन्न आर्थिक, पर्यावरणीय, और सामाजिक लाभ प्रदान करता है। इसके लिए उचित भूमि, जलवायु, और पानी के समर्थन में किसानों को उचित देखभाल और नियंत्रण के साथ पौधे उगाने चाहिए। विशेष रूप से धार्मिक और आर्थिक उद्दीपन के लिए चन्दन की उत्पादन व्यापारिक रूप से महत्वपूर्ण है, जिससे इस खेती का विकास और उन्नति हो सकती है। चन्दन की खेती की जानकारी के माध्यम से अधिक से अधिक किसान और उन्नति के इच्छुक लोग इस विकल्प को अधिकारियों और सफलता की दिशा में अधिकारी कर सकते हैं।

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Scroll to Top