गन्ना की खेती(sugarcane): से पर हेक्टेयर 1.5 Lakh/Year तक के फायदे

गन्ना की खेती: गन्ने की खेती से जुड़ी जानकारियां, फायदे और तरीके

गन्ना की खेती भारत में एक सबसे लाभप्रद ब्यवशायिक खेती है जिसमे किसान को हानि होने का बहुत काम चान्स होता है और सभी परिस्थितियां में भी किसान को फसल को बहुत अधिक नुकसान नहीं होता और इसीलिए यह एक लाभकारी खेती है|

भारत में कुल गन्ना का लगभग 50 % खेती की मुख्य मध्य – प्रदेश ( MP ) के कुछ जिले में जैसे -छिंदवाड़ा, नरसिंहपुर, बुरहानपुर, दतिया व बैतूल है| प्रेजेंट में ये जिले सबसे ज्यादा गन्ने की खेती करते है |

Table of Contents

गन्ना फसल (SUGAR CANE) उत्पादन की प्रमुख्य समस्याएं

  1. नए तरीको को न मानना और पुराने तरीको पर निर्भर रहना |
  2. रोग प्रतिरोधी की उपयुक्त किस्मो की उन्नत बीजो का उपयोग न करना |
  3. बीजो उत्पादन में जानकारी का अभाव
  4. बीज उपचार न अपनाने से बीजो में जनित रोगो और कीड़ो का प्रकोप और MORE पौध संरक्षण उपायों को मानना
  5. आय में कमी कतार से कतार की दुरी काम रखना
  6. पोषक तत्वों एवं संतुलित प्रबंधन न होना
  7. उचित जड़ी अभाव
  8. जल निकास व सिचाई में कमी
  9. गन्ना की मुख्य उपयोगी यंत्रो की कमी

गन्ना फसल (SUGAR CANE)ही क्यों चुने

  • गन्ना एक बहुत उपयोगी फसल है जिससे हमे प्रति हेक्टेयर कम से कम 1 . 5 लाख से 2 लाख का फायदा कर सकते है |
  • बहु उपयोगी फसल जैसे -गेंहू , मक्का , ज्वर ,सोयाबीन ,धान की फसलों से भी ज्यादा मुनाफा कमा सकता है |
  • ये बहुत कम जोखिम भरी फसल मानी जाती है , गन्ने की खेती में कीट , रोग और विपरीत (OPPOSITE) परिस्थितियों में भी कम हानि होता है |
  • गन्ना की खेती से 3-4 में ही प्रारंभिक लागत निकाली जा सकती है |
  • गन्ना की खेती से किसी भी फसल को कोई नुकसान नहीं है \

उपयुक जमीन (खेती), मौसम (SEASON) एवं खेती की तयारी

गन्ने की खेती कम व् भारी काली मिटटी में की जा सकती है | गन्ने की खेती में दोमट मिटटी जिसमे सिचाई व् जल निकास की उचित ब्यवस्था हो और इसका PH मान 6.5 से 7.5 के मध्य हो तो गन्ने की खेती के लिए बहु उपयोगी होता है |

वर्षा ऋतू( मौसम) –गन्ने की खेती वर्षा ऋतू में 2 बार की जा सकती है \

शरद ऋतू बुवाई इस ऋतू में गन्ने की खेती नवम्बर में की जाती है और फसल 11 से 15 महीने में तैयार होती है |

बशंत ऋतू इस ऋतू में गन्ने की खेती की बुवाई फ़रवरी से मार्च के महीने में होती है | इसमें फसल 9 से 13 महीने में तैयार होती है |

नोट -सरद ऋतू में गन्ने की खेती ,बसंत ऋतू में बोये जाने वाले गन्ने से 26 से 30 प्रतिसत एवं ग्रीष्म ऋतू में 32 से 42 प्रतिसत की अधिक पैदावार होती है |

गन्ना की खेती , sugarcane , गन्ने की खेती के फायदे

खेत की तैयारी करना

गर्मी में खेती की गहरी जुताई 15 मई से पहले करले | और इसके बाद देशी हल , रोटा वॉटर, या कल्टी वेटर व पाटा चलकर खेत को भुरभुरा बनाना | जिससे खेत भर भूरा और खरपतवार रहित और समतल हो जाये |

और रिजर के सहायता से 3 से 4 .5 फुट की दुरी में 20 – 23 सेंटीमीटर का गढ्ढे बांये |

उन्नति किस्म की बीज व तैयारी व चयन

गन्ने की खेती में सबसे बड़ा जड़ यही है की इसकी बीड का गलत चयन (अस्वस्थ बीज )

गन्ने का फसल का पूरा तना न बोकर के इसके बीज को २ या 3 टुकड़े में बोये | इसमें गन्ने की ऊपरी भाग का अंकुरण 100 %, बीज में 40 %और निचे के भाग में सिर्फ 20 % ही होता है |

दो आँखों वाला टुकड़ा ही सर्वो पारी है |

गन्ना बीज (sugarcane seeds)का चुनाव करते समय सावधानियां

  1. गन्ने की खेती(उन्नत ) में चाँच ले की बीज स्वस्थ्य और शुद्ध निरोग हो
  2. गन्ने का बीज लगभग 7 से 8 महीने से काम न हो और किसी प्रकार के कीट व् रोग न हो , और जिसे देखरेख में सिचाई और खाद मिलता रहा हो |
  3. यदि बीज नर्म हवा या टिस्यू कल्चर से उगाया गया हो ,इसीतरह के बीजो का चयन करे |
  4. हर बीजो को 5 साल तक बदल देना चाहिए , क्योकि गन्ने के बीजो में अनेक प्रकर के रोग ग्रस्त हो जाते है |
  5. बीजो को काटने के बाद समय से बुवाई कर दे |

गन्ने की खेती की उन्नत जातियां

गन्ने की खेती के लिए आप उन्नत बीजो का ही चयन करे , क्योकि ये गन्ने की खेती को 20 से 25 प्रतिसत उत्पादन बड़ा देने में सक्षम होता है|

मध्य प्रदेश में कुछ उन्नत किस्मो का वर्णन
किस्मशक्कर (प्रतिशत में)अवधि (माह)उपज (टन/हे.)प्रमुख विशेषताए
शीघ्र(FAST) पकने वाली जातियां
को.सी.-67120-2210-1290-120शक्कर के लिए उपयुक्त, जड़ी के लिए उपयुक्त, पपड़ी कीटरोधी।
को.जे.एन. 86-14122-2410-1290-110जड़ी अच्छी, उत्तम गुड़, शक्कर अधिक, उक्ठा, कंडवा, लाल सड़न अवरोधी।
को.86-57220-2410-1290-112अधिक शक्कर, अधिक कल्ले, पाईरिल्ला व अग्रतना छेदक का कम प्रकोप, उक्ठा, कंडवा, लाल सड़न अवरोधी।
को. 9400818-2010-12100-110अधिक उत्पादन, अधिक शक्कर, उक्ठा, कंडवा, लाल सड़न अवरोधी।
को.जे.एन.982320-2010-20100-110अधिक उत्पादन, अधिक शक्कर, उक्ठा, कंडवा, लाल सड़न अवरोधी।

गन्ना बुवाई का सबसे अच्छा समय अक्टूबर-नवम्बर ही क्यों माना जाता है


1.गन्ने की खेती में पहले से लगने वाले कीट का प्रकोप नहीं होता
2.गन्ने की खेती के बीज का अंकुरण अच्छा होने से बीजो की संख्या में कमी हो जाती है
3.अच्छी बढ़ोतरी वाले बीजो में खरपतवार काम होती है
4.गन्ने की खेती(SUGARCANE) में जल की कमी होने पर ,देर से बोई गयी फसलों में नुकसान(LOSS) कम होता है
5.फसल के जल्दी होने पर पिराओ जल्दी सुरु कर सकते है
6.इन दिनों फसल की जड़ काफी मजबूत होती है

गन्ने की खेती में रासायनिक/यांत्रिक नियन्त्रण तरीका

सिमैजीन 2.24 किलोग्राम /हेक्टेयर गुड़ाई के पहले इसके रसायनिक छिड़काव से काफी अच्छा लाभ प्राप्त होता है |

गन्ने की फसल में रसायनों के छिड़काव में होने वाली विशेष सावधानियॉं

  • रसायन को प्रयुक्त मात्रा में 1125 Liter पानी मिलकर डालना चाहिये।
  • रसायनिक छिड़काव से इसमें काफी गडकरी लाभ प्राप्त होता है |
  • रसायन समय समय से करना चाहिए जिससे नमी बरक़रार रहे ।
  • जमाव पहले एवं बाद में खरपतावार नियन्त्रण के लिए रसायनों का छिड़काव जरुरी होता है | गन्ना बुवाई के बाद क्रमशः 7se 15 दिन व 50-से 65 दिन में करना चाहिए ।
  • अगर आप मिश्रित खेती कर रहे है तो आप को रसायनिक छिड़काव नहीं करना चाहिए |

गन्ने के पौधों की सिंचाई करने का उचित समय

गन्ना लगाने के बाद इसमें रोपाई आद्रता भूमि की जाती है | इसमें जरुरी नहीं होती सुरुवाती सिचाई |परन्तु गर्मी के सीजन में har सप्ताह पौधों को पानी देना चाहिए और सर्दी में 16 से 22 दिन में पानी देना चाहिए |

गन्ने की खेती में होने वाले खपतवार में नियंत्रण करना जरुरी

गन्ने की खेती में खरपतवार में नियंत्रण के लिए हम दोनों बिधि का प्रयोग करते है –
1 – प्राकृतिक – में निराई -गोड़ाई आदि शामिल होते है |
2 – रासायनिक -में हम कुछ रसायनो का प्रयोग करते है जैसे -सिमैजीन 2.24 किलोग्राम /हेक्टेयर |

गन्ने में लगने वाले रोगो और उनके बचाव के लिए उपचार

लाल सडन रोग
यह रोग गन्ने के बीच में पाए जाते है और इसके बचाव के लिए कार्बेन्डाजिम की उचित मात्रा से बीजो का बचाव किया जाता है |

कंडुआ रोग
यह रोग पौधे के किसी भाग में मिल जाता है और इसकी वजह से पौधे का ऊपरी भाग पूरा कला हो जाता है |इसके बचाव के लिए हम कार्बेन्डाजिम या कार्बोक्सिन का सही मात्रा में छिड़काव करते है |

उकठा रोग
यह रोग कटाई के समय देखने को मिलता है जो तने को खोखला बना देता है | इसके बचाव के लिए कार्बेन्डाजिम की सही मात्रा का पौधे पर छिड़काव करना |

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ड्रैगन फ्रूट्स की खेती

विशेष सुझाव (instructions)-

  • मृदा परीक्षण के आधार से तत्वों की आपूर्ति करे
  • गन्ने की खेती में सिंगल सु.फ.के उर्वरक के करने पर 13 प्रतिसत गंधक तत्व (61कग/हेक्टेयर )अपने आप बन जाते है |
  • जैव उर्वरकों के उपयोग(USE) से 20 प्रतिषत नइट्रोजन व 26 प्रतिषत स्फुर तत्व की पूरा न होने के कारण रसायनिक उर्वरकों के उपयोग(USE) में कटौती करें।
  • जैविक खादों की अनुमानित मात्रा उपयोग करने पर नइट्रोजन की 100 कि.ग्रा./ हे, रसायनिक तत्व के रूप में कटौती निकले |

SugarCane Related Question and Answer

गन्ना कितने दिन में तैयार होता है?

गन्ना कम से कम 10 से 12 माह में तैयार होता है |

गन्ने को पकने में कितने महीने लगते हैं?

गन्ना कम से कम 10 से 12 माह में तैयार होता है |

1 एकड़ में कितना गन्ना पैदा हो सकता है?

1 एकड़ में गन्ना की पैदावार लगभग 330 से 350 प्रति एकड़ उत्पादन हो जाता है |

एक बीघा में कितना गन्ना बोया जाता है?

एक बीघा में लगभग 65 से 70 कुंतल तक प्राप्त किया जा सकता है |

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