जैव उर्वरकों के उपयोग: खेती में नए दिशा-निर्देश 2023

jaiv urvarak ke upyog (परिचय)

जैव उर्वरकों का कृषि उत्पादन में महत्त्वपूर्ण योगदान होता है क्योंकि ये पौधों को पोषण प्रदान करके उनकी वृद्धि और प्रतिफल में सुधार करते हैं। ये उर्वरक प्राकृतिक रूप से पैदा होते हैं और पौधों के लिए निःशुल्क होते हैं। इसके साथ ही जैव उर्वरकों का उपयोग करने से भूमि की उर्वराशक्ति भी बनी रहती है और प्राकृतिक संसाधनों का सुरक्षित उपयोग होता है।

जैव उर्वरकों के उपयोग से फसलों का प्रतिदिन बढ़ता है, पोषण मानक बनता है और उनकी मानव सेहत के लिए भी अधिक उपयोगी बनते हैं। जैव उर्वरकों का उपयोग करने से भूमि की फुलावदीता बढ़ती है और सूक्ष्मजीवों की वृद्धि होती है जो पौधों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होते हैं।

जैव उर्वरकों का उपयोग करने से पर्यावरण को भी कई लाभ मिलते हैं। ये उर्वरक प्राकृतिक रूप से पैदा होते हैं और किसानों को उचित मूल्य पर मिलते हैं, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत होती है। इसके साथ ही जैव उर्वरकों का उपयोग करने से भूमि की उर्वराशक्ति बनी रहती है और वनस्पतियों का संरक्षण भी होता है।

जैव उर्वरकों के उपयोग से कृषि उत्पादन में वृद्धि होती है और फसलों की मानव सेहत के लिए भी अधिक उपयोगी बनते हैं। इनका उपयोग करके किसान अधिक उत्पादन प्राप्त कर सकते हैं और उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत हो सकती है। इसके साथ ही पर्यावरण को भी कई लाभ मिलते हैं, और सूक्ष्मजीवों के वर्द्धन से प्राकृतिक संसाधनों का सुरक्षित तथा समृद्ध उपयोग होता है।

ORGANIC FARMING

अधिकांश देशों में जैव उर्वरकों का उपयोग करने की प्रौद्योगिकी और तकनीक विकसित हो चुकी है और यह उन देशों के किसानों के लिए बहुत ही उपयोगी सिद्ध हो चुका है। भारत में भी जैव उर्वरकों के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए कई सरकारी योजनाएं चलाई जा रही हैं और किसानों को इसके लाभों के बारे में जागरूक किया जा रहा है।

इसके अलावा, जैव उर्वरकों के उपयोग से भूमि की उर्वराशक्ति बनी रहती है और प्राकृतिक संसाधनों का सुरक्षित उपयोग होता है। इससे भूमि की फुलावदीता बढ़ती है और सूक्ष्मजीवों की वृद्धि होती है जो पौधों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होते हैं।

इस प्रकार, जैव उर्वरकों का कृषि उत्पादन में महत्त्वपूर्ण योगदान होता है और इनके उपयोग से किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत होती है। ये उर्वरक प्राकृतिक रूप से पैदा होते हैं और पौधों को उनकी आवश्यकतानुसार पोषण प्रदान करते हैं। इसके साथ ही जैव उर्वरकों के उपयोग से पर्यावरण को भी कई लाभ मिलते हैं और सूक्ष्मजीवों की वृद्धि होने से प्राकृतिक संसाधनों का सुरक्षित उपयोग होता है।

जैव उर्वरकों के उपयोग (Jaiv Urvarak Ke Upyog)

जैव उर्वरक खेती में पौधों की वृद्धि और उत्पादकता को बढ़ावा देने वाले उपकरण होते हैं। इनमें प्राकृतिक तत्वों का संयोजन होता है जो कि पौधों की ग्रोथ को प्रोत्साहित करते हैं। इनका प्रयोग करके किसान नकली खादों और कीटाणुनाशकों से बच सकते हैं और उनके फसलों की पैदावार में वृद्धि कर सकते हैं।

जैव उर्वरकों के उपयोग से फसलों की 10 से 20 प्रतिशत तक बढ़ी पैदावार में न केवल वृद्धि होती है, बल्कि फलों और दानों का प्राकृतिक स्वाद भी सुरक्षित रहता है। इनके प्रयोग से 20-30 किलोग्राम नत्रजन की बचत की जा सकती है। ये खाद कुछ वृद्धि कारक हारमोन्स और विटामिन्स का उत्सर्जन करते हैं जिससे पौधों के विकास में सहायता मिलती है।

जैव उर्वरकों के प्रयोग से अंकुरण शीघ्र और स्वस्थ होता है और जड़ों का विकास अधिक और शीघ्र होता है। जिससे कल्ले अधिक बनते हैं, उन जैव उर्वरकों के कारण जीवाणुरोधी और एंटीबायोटिक पदार्थ उत्पन्न होते हैं, जिनसे पौधों की रोग-प्रतिरोधक क्षमता में वृद्धि होती है और फसल को बीमारियों से सुरक्षा मिलती है।

जैव उर्वरकों के आदर्शित प्रयोग से पौधों की जड़ें और तने अत्यधिक विकसित होते हैं, जिससे पौधों में अधिक वेगवान हवा का सामर्थ्य, अधिक वर्षा और सूखे की परिस्थितियों का सहनशीलता बढ़ती है। नील हरित शैवाल खाद भी एक प्रकार का जैव उर्वरक है जो धान के खेत में प्रयोग किया जाता है। यह खाद धान की उत्पादन में अद्वितीय रूप से वृद्धि करती है और पौधों की ग्रोथ को सहायक बनती है।

फास्फेटिका कल्चर भी एक तरह का जैव उर्वरक है जो पौधों को नत्रजन और फास्फोरस की उपलब्धता बढ़ाता है। ये उर्वरक पौधों के लिए वृद्धि कारक पदार्थ भी प्रदान करते हैं और पर्यावरण को स्वच्छ रखने में मदद करते हैं।

इस तरह से, जैव उर्वरकों के प्रयोग से किसान अपनी फसलों की पैदावार बढ़ा सकते हैं और प्राकृतिक तरीके से फसलों की देखभाल कर सकते हैं। इनके प्रयोग से कृषि उत्पादन में वृद्धि होती है और पौधों की स्वास्थ्य देखभाल भी की जा सकती है।

जैव उर्वरक के उपयोग के फायदे :

1. राइजोबियम जीवाणु के प्रयोग से लाभ :

   – इसके प्रयोग से 10-20 किग्रा. रासायनिक नत्रजन की बचत होती है।

   – फसल की उपज में 20-35 प्रतिशत की वृद्धि होती है।

   – यह जीवाणु हारमोन्स एवं विटामिन भी बनाते हैं, जिससे पौधों की बढ़त अच्छी होती है और जड़ों का विकास भी अच्छा होता है।

   – इन फसलों के बाद बोई जाने वाली फसलों में भी भूमि की उर्वरता तथा स्वास्थ्य सुधारने से अच्छी पैदावार प्राप्त होती है।

   – उर्वरकों का लगभग एक तिहाई भाग पौधों के संग्रहण और विकास में खर्च होता है।

2. फास्फेटिका खाद से लाभ :

   – फास्फेटिका जैव उर्वरक के प्रयोग से फसलों की 10-20 प्रतिशत तक पैदावार में वृद्धि होती है।

   – यह उपर्गत फास्फोरस की बचत की भी सहायक होती है।

   – जड़ों का विकास अधिक होता है, जिससे पौधा स्वस्थ रहता है।

3. माइकोराइजा से लाभ :

   – इसके प्रयोग से पौधों को फास्फोरस, पोटाश, कैल्शियम और सूक्ष्म तत्वों की अधिक उपलब्धता होती है।

   – वृद्धि वर्धक (साइटोकाइनिन) हार्मोन्स प्राप्त होते हैं, जिससे पौधों की विकास और बढ़त अच्छी होती है।

   – पौधों के लिए जल की उपलब्धता भी बढ़ जाती है।

जैव उर्वरकों का प्रयोग करते समय ध्यान देने योग्य बातें :

1. जैव उर्वरक या उनसे उपचारित बीजों को किसी रासायनिक खाद के साथ मिलाने से दूर रहें, ताकि प्राकृतिक सृजनशीलता का आनंद उठा सकें।

2. राइजोबियम जीवाणु का प्रयोग केवल उस फसल में करें, जिसके लिए यह विशिष्ट होता है।

3. कृपया उर्वरकों का पैकेट उस अंतिम तिथि से पहले ही ख़त्म कर दें, जैसे की वे एक प्राचीन यात्री हों जो विपथ पर निकल जाता है।

4. उर्वरक को धूप और गर्मी से बचाएं, उसे सुखे और ठंडे स्थान पर रखें।

5. फास्फेटिका खाद का प्रयोग भूमि की उर्वरता बढ़ाने और नत्रजन की बचत के लिए करें।

6. माइकोराइजा का प्रयोग फास्फोरस, पोटाश, कैल्शियम और सूक्ष्म तत्वों की अधिक उपलब्धता के लिए एक नई दिशा में करें।

NOTE : इन बातों का पालन करके, जैव उर्वरकों के प्रयोग से आप अपनी फसलों की पैदावार में वृद्धि कर सकते हैं और साथ ही पौधों की स्वस्थता और विकास को भी बढ़ा सकते हैं।

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