लीची की खेती कर देगी माला माल : किसानो के लिए एक सुनहरा मौका

परिचय : लीची की खेती
लीची एक फल होता है जो की बहुत रसीला और लाभदायक है |इसमें बहुत सारी बिटामिन्स पायी जाती है जैसे-विटामिन सी , विटामिन बी-काम्प्लेक्स का एक अच्छा स्रोत्र है | सबसे पहले इसकी खोज दक्षिणी चीन में हुयी थी |
पहला नम्बर पे चीन और दूसरे पर इसके ब्यवशाय में भारत आते है |
लीची की खेती भारत में सबसे पहले जम्मू कश्मीर, उत्तर प्रदेश एवं मध्य प्रदेश में की जाती है। और लीची की खेती
बढ़ती मांग को ध्यान में रखकर लोगो ने अन्य प्रदेशो में भी इसकी खेती चालू कर दी है जैसे – छत्तीसगढ़, उड़ीसा, पंजाब, बिहार, झारखंड, हरियाणा, उत्तरांचल, इसके अलावा भी आसाम और त्रिपुरा , पश्चिमी बंगाल इत्यादि राज्यों में भी लीची की खेती होने लगी है |

Table of Contents

लीची (Lichi) का इतिहास

लीची की खेती 1059 ईस्वी में south china, मलेशिया और उत्तरी क्षेत्रा में शुरू हुई थी। लीची फल एक स्वादिस्ट खाने वाले फल में इसकी गिनती की जाती है । पहले राजा महाराजा के बहुत प्रिय फल होते थे | यह फल बहुत ही लुभावना और आर्षिक फल होता है |
भारत में, लीची 18वीं शताब्दी में सुरुवात हुयी और फिर धीरे धीरे सारे देसो में फलता गया |

लीची की खेती के लिए भूमि एवं जलवायु

TemperatureRainfallSowing TemperatureHarvesting Temperature
25-35°C1200mm25-35°C25-30°C

जैसा-की हम सब जानते है की लीची की खेती के लिए गहरी बलुई दोमट मिटटी और सामान्य ph -7.5-8 मान की आवयश्कता होती है |बिहार में पाए जाने वाले कल्केरियस मिटटी जिसकी पानी धारण करने की क्षमता जयदा होती है और यह मिटटी लीची की खेती के लिए उत्तम मानी जाती है | लीची की खेती थोड़ा अम्लीय और लेटराइट मिटटी जा जयदा अच्छे की जा सकती है | इसकी खेती जल निकास बनाकर करने में ज्यादा लाभ होता है |

मुख्य किस्मे : लीची की खेती

कलकत्तिया (Calcuttia) :इस प्रकार के किस्म में फल बड़े और आकर्षित करने वाले होते है |इस किस्म में फल की तोड़ाई जून माह के अंतिम दिनों में की जा सकती है | और इसमें- Calcuttia फल लच्छेदार और अच्छी गुडवत्ता से भरपूर एवं स्वाद में टेस्टी होते है |

देहरादून (Dehradun):यह एक प्रकार के सबसे जल्दी पैदावॉर वाली किस्म है इसके फल जून माह के 10 के बाद तोड़े लिए जा सकते है | देहरादून प्रजाति में रंग बड़ा आकर्षित होते है | इस किस्म में फल मीठे रसभरे और नरम एवं स्वादिस्ट होता ही |

सीडलेस लेट(Seedless late): इसमें फल गुच्छे से भरपूर पाया जाता है। सीडलेस लेट रंग गहरा लाल और स्वाद में मीठा और रस भरपूर होता है और इसकी फसले जून माह के तीसरे सप्ताह में तैयार (Ready) पायी जाती है।

रोज सेंटेड (Rose Scented): इस किस्म को मध्यम ऋतू की किस्म और प्रसिध्य मानी जाती है | इसमें फल बहुत रसीले और स्वादिस्ट होते है |

उन्नति किस्में

पक्वता वर्गपरिपक्वता अवधिकिस्में
अगेती15-30 मईशाही, त्रिकोलिया, अझौली, ग्रीन, देशी।
मध्यम01-20 जूनरोज सेंटेड,डी-रोज,अर्ली बेदाना, स्वर्ण रूपा।
पछेती10-15 जूनचाइना, पूर्वी, कसबा।

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लीची की खेती के लिए ज़मीन या भूमि की तैयारी

खेत की जुताई पहले 3 बार तिरछी करे और उसके बाद जमीन को समतल करे जिससे की खेत में पानी रुक न पाए | इस तरह से खेती को तैयार करना है |

बिजाई का तरीका

लीची की बिजाई का समय

लीची की खेती का बिजाई का समय बरसात या मौसम के बाद अगस्त , सितम्बर माह में की जाती है | पंजाब में कभी कभी नवंबर तक की गयी है | लीची की बिजाई में कम से कम दो वर्ष पुराने पौधे का चयन करना चाहिए |

लीची के पदों में अंतराल

लीची की बिजाई में वर्गाकार के रूप के लिए हम पंक्ति सा पंक्ति की दुरी लगभग 8 -10 मी . और पौधे से पौधे की बीच का गैप हम 8 -10 मी . रख सकते है |

लीची के बीज की गहराई

कुछ समय पहले एक मी. x एक मी. x एक मी. के गड्ढे सूरज के धुप में खोद ले | और फिर गड्ढे में 22 – 25 किलो साड़ी गली खाद भर दे , फिर उसमे पोटास 300 ग्राम ऑफ़ मयूरते और 2 kg डाले |ये सब करने के बाद गड्ढो में ऊपर से पानी का छिड़काव कर दे | और फिर पौधे को बीचो बीच लगा दे |

लीची के बिजाई का तरीका

लीची की बिजाई का तरीका हम सीधे बीज लगाकर एवं पनीरी से की जाती है |

प्रजनन (लीची)

बड़े ब्यवसाय के पर लीची उगाने (लीची की खेती)के लिए एयर लेयरिंग तरीके को प्रयोग किया जाता है। बीज बनाना बहुत Esay नहीं है , इस प्रक्रिया के लिए पौधे को लंबा समय लगता है। एयर लेयरिंग में पौधे की टहनियां कीड़े एवं बीमारियां रहित रहना चाहिए, जिसका व्यास 2-3 CM लम्बाई 30-60CM रहे । चाकू या कटर की मदद से टहनियों के ऊपर 4CM चौड़ा गोल आकार का आकार बनाये ।

गोल आकारबनाने के बाद उसके ऊपर दूसरी टहनी लगा दे और लिफाफे से बांधकर रख दें। एक माह के बाद टहनी जुड़ना सुरु हो जाती हैं। जब टहनी पूरी तरह बनने लगे तो उसे पेड़ से अलग कर दें। इसके बाद पौधे को मिट्टी में लगा दें और इसमें पानी देना शुरू करे । एयर लेयरिंग(AIR LAYRING ) का समय मध्य जुलाई से सितंबर माह में जाती है।

लीची कटाई और छंटाई

शुरूआत में अच्छा आकार देने के लिए कटाई बहुत जरूरी हो जाती है।लीची ( लीची की खेती) के पौधों के लिए छंटाई की ज्यादा कोई जरूरत नहीं पड़ती है। फलों की कटाई के बाद हल्की छंटाई करें जिससे नयी टहनिया आ जाये।

अंतर-फसलें

लीची की खेती एक धैर्य रखने वाली खेती है जिसमे 7-10 साल फसल को तैयार होने का समय लग जाता है। पहले के 3-4 साल तक अंतर फसलें उगाई जा जाती हैं,जिस समय आमदन बढ़ती है, और मिट्टी की उपज की शक्ति में भी वृद्धि होती है। इसके आलावा नदीयो को भी कंटरोल(CONTROL) किया जा सकता है। इनके साथ तेजी से उगने वाले पौधे जैसे कि-आलू बुखारा, आड़ू, किन्नू अंतर फसलों को भी उगाए जा सकते हैं।

लीची की खेती वाले क्षेत्र में कीड़ों, पतंगों और शहद वाली मक्खियों द्वारा किया जाता है। 20-25 शहद की मक्खियों के डिब्बे क्षेत्र में प्रति हैक्टेयर रखे जाते हैं।

लीची की खेती में खाद के टेबल सारणी

फसल की वर्ष (Year)अच्छी मात्रा में गाय का गोबर (KG)यूरिया इन ग्रामSSP इन ग्रामMOP इन ग्राम
पहले की तीन साल10-20150-500200-60060-150
चार से 6 साल में20-40500-1000750-1250200-300
सात साल से दस साल के बीच40-501000-15001500-2000300-500
दस साल के बाद6016002250600

लीची की खेती में सिंचाई

पौधे के विकास के हर समय पर सिंचाई करना।पौधे के शुरूआती विकास के समय में पानी लगाना बहुत महत्वपूर्ण है। ग्रीष्म ऋतु में नए पौधों को एक सप्ताह में दो बार और पुराने पौधों को सप्ताह में एक बार पानी देना जरुरी है। खाद डालने के बाद कम से कम एक सिंचाई ज़रूर करना । नवंबर के अंत और दिसंबर के पहले सप्ताह में पानी देना क्योकि कोहरा से बचाने में उपयोगी होता है । फल आने पर सिंचाई बहुत ज़रूरी होता है। इस समय में सप्ताह में दो बार पानी देना आवश्यक होता है । इस प्रकार सिचाई करने से फलो की बृद्धि होती है और फल की मात्रा में भी बढ़ावा होता है |

पौधे की देखभाल

हानिकारक कीट और रोकथाम

फल छेदक वाले कीड़े : इसमें फल के ऊपर वाले भाग से यानि छिल्के से भोजन प्राप्त करते है ,और इस प्रकार फल को नुकसान पहुंचाते है। छोटे-छोटे छिद्र फलों के ऊपर दीखते हैं।

लीची के खेती वाले बाग को साफ रखने का प्रयास करे | प्रभावित फल या गिरते हुए फल को दूर कही बहार ले जाकर नष्ट कर दें। ट्राइकोग्रामा(TRIKOGRAMA ) 20000 अंडे प्रति एकड़ (EKAD) या निंबीसाइडिन(NINBISAIDIN) 50 ग्राम + साइपरमैथरिन(SAIPARMATHERIN) 25 ई सी 8 ML और डाइक्लोरवास(DAIKLORVASH) 20 ML / 10 लीटर पानी में मिक्स करके फल बनने के समय और रंग बनने के समय स्प्रे (SPRAY)करना जरुरी है । सात दिनों के अंतराल में दोबारा स्प्रे करें

जूं : एक लीची की फसल को बर्बाद करने वाला खतरनाक कीड़ा है।

इस बीमारी से प्रभावित हिस्सों को नष्ट कर देना जरुरी । डीकोफोल(DECOPHOLE) 17.8 ई सी ,3 मि.ली. या प्रॉपरगाइट(PROPARGITE) 57 ई सी 2.5 मि.ली. को प्रति लीटर पानी में मिक्स करके सात दिनों के अंतराल में स्प्रे करना चाहिए ।

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ड्रैगन फ्रूट्स की खेती

लीची के पत्तों का सुरंगी कीट : इसका हमला पत्तों पर होता है जब ये दिखे तो पत्तो को तोड़ देना चाहिए। डाइमैथोएट(DAIMATHEOATE ) 30 ई सी 200 मि.ली. या इमीडाक्लोप्रिड(EMIDAIKLOPRID) 17.8 एस एल 60 मि.ली. को 150 लीटर पानी में मिक्स करके फल लगने के समय स्प्रे करना जरुरी और इसमें 15 दिनों के गैप में दूसरी स्प्रे करें।

बीमारियां और रोकथाम की आवश्यकता

पत्तों के निचली तल में सफेद धब्बे : इसे हम भूरेपन के रोग के नाम से भी जाना जाता है। फूलों,पत्तों, और कच्चे फलों के ऊपर सफेद(WHITE) धब्बों के साथ भूरे दाग नज़र आने लगते हैं। यह पके फलों पर भी हमला कर सकती है। मौसम के बदलने से इस बीमारी को बढ़ावा मिलता है |

सार्ड ऋतू में इस बीमारी से बचने के लिए कॉपर(CU) ऑक्सीक्लोराइड( OKSICLORIDE) की स्प्रे करें।

कुछ निम्न प्रकार की बीमारिया है

  • एंथ्राक्नोस
  • पौधों का सूखना और जड़ गलन
  • लाल कुंगी
  • फल गलन

लीची की खेती से और अधिक जानकारी के लिए क्लिक करे

लीची की फसल की कटाई-

जब फल का रंग हरे से गुलाबी या लाल होने लगे और फल की सतह बराबर हो तो फल पकने का पहचान है |

फलो के गुच्छों में तोड़ा लिया जाता है।जब फल तोडा जाता है तो हम फल के साथ कुछ टहनियां और पत्ते भी तोड़ना जरुरी होता है । लीची को हम ज्यादा लम्बे समय के लिए स्टोर नहीं किया जाता है ।गाओं के बाजार में बेचने के लिए इसको पकने के बाद तोड़े और जब मंडी या बहार भेजना हो तो कम पका होने पर ही थोड़े |

LYCHEE के कटाई के बाद

तुड़ाई के बाद फलों की छटाई इनके रंगो के आधार पर अलग -अलग कर लेना चहिए। जो लीची के हरे पत्तों(LEAVES) को बिछाकर टोकरियों में इनकी पैकिंग कर लेनी चाहिए। लीची के फलों को 1.6-1.7 डिगरी सैल्सियस तापमान और 85 से 90 प्रतिशत नमी में स्टोर रखना चाहिए। फलों को इस तापमान पर 8-से 12 सप्ताह के लिए स्टोर किया रखा जा सकता है।

भारत में कहां-कहां होती है लीची की खेती

लीची की खेती भारत में सबसे पूर्व jammu -kashmir , उत्तर प्रदेश एवं मध्य प्रदेश(MP) में की जाती है,और इसकी बढ़ती मानगो को देखकर ,अन्य प्रदेशो में भी इसकी खेती की सुरुवात कर दी गयी है जैसे – छत्तीसगढ़, उत्तरांचल, उड़ीसा, पंजाब, बिहार, झारखंड, हरियाणा,इसके अतिरिक्त भी आसाम और त्रिपुरा , पश्चिमी बंगाल इत्यादि राज्यों में भी लीची की खेती करना लोगो ने सुरु कर दिया है |

लीची(Lichi) के स्वास्थ्य लाभ

  1. इस फल में पोषक तत्वों का बहुत जयदा स्रोत है ,जो रक्त को बनाने में आवश्यक है। यह RBC के निर्माण के लिए जरुरी तांबा, मैंगनीज, मैग्नीशियम, लोहा प्रदान करता है। जो हमारे सरीर के लिए बहुत उपयोगी होते है |

2. लीची में अच्छी मात्रा में विटामिन-C, विटामिन B-Complex और fitonutrions फ्लेवोनॉयड्स होते हैं।

3. लीची में अच्छी मात्रा (Good Quantity)में फाइबर भी पाया जाता है |

4. इसमें उच्च Quantity में एंटीऑक्सीडेंट होते हैं ,जो बुढ़ापा जल्दी नहीं आने देता ।

5. लीची में पोटेशियम की अच्‍छी मात्रा होती है, जो की सोडियम के स्‍तर को बराबर बनाए रखता है।

लीची में पोषक तत्व और विटामिन

लीची खाने से पानी की कमी दूर होती है | इसमें बिटामिन -C , बिटामिन B-6 , नियासिन ,राइबोफ्लेविन ,फोलेट , ताम्बा , पोटैशियम (K), मैग्नीशियम , फास्फोरस एवं मगनीज प्रकार के खनिज(Eat) प्राप्त होते है | लीची हमारे BODY को और पेट को ठंडक बनाये रखता है और इससे हमे इम्युनिटी भी काफी मजबूत होती है |

लीची: स्वास्थ्य लाभ और दिलचस्प रेसिपी

कुछ रोचक नुस्खे

1. लीची और नीबू का शर्बत : लीची और चीनी को एक साथ मिलाकर चाशनी बना ले | इसे ठंडा करने के बाद इसमें नींबू मिलाकर शर्बत बना लें।यह शरबत गर्मी में बहुत रहत देता है |

2. लीची (Lichi) और रोजवाटर आइसक्रीम: कुछ लीची को उनके सिरप के साथ फूड प्रेसर कुकर में डालें।और कुछ रसभरी और गुलाब जल इसमें डालें इसे बराबर चिकना होने तक फेटते रहे । फिर इसमें कटोरे में, क्रीम को मुलायम होने तक फेंटें।उसके बाद इसमें दूध और लीची स्वाद अनुसार डाले, और फिर इसे एक अंतिम तेज व्हिस्क दें। इसके बाद इसे फ्रीज़(Freeze) रखे।

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3. थाई झींगा और लीची(Lichi) सलाद:

4. लीची(Lichi) और लेमन बॉल ड्रिंक:

5. लीची(Lichi) और तरबूज का घोल:

FAQ

लीची की खेती कब और कैसे करें?

उपरोक्त

लीची की खेती कहाँ होती है?

लीची की खेती पहले चीन में होती है और अब भारत के कई राज्यों में होती है |

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