Mungfali Ki Unnat Kheti की सम्पूर्ण जानकारी इन हिंदी (2023)

आज हम अपने ब्लॉग पोस्ट में Mungfali Ki Unnat Kheti (मूंगफली की उन्नत खेती )की सम्पूर्ण जानकारी , mungfali ki kheti ki jankari | mungfali ki kheti kaise karen | mungfali ki unnat kisme | mungfali ki kheti ki sampurn jankari | मूंगफली की खेती के बारे में डिटेल्स से जानकारी देने का प्रयास करेंगे |

कृषि विज्ञानं केंद्र चौमू (टांकरड़ा ) , जिला जयपुर हेल्पलाइन न. 01423 -235133

Table of Contents

मुगफली का परिचय

मुगफली एक बहुत महत्वपूर्ण खाद्य फसल है और Mungfali Ki Unnat Kheti के तरीके को आजमा कर आप उच्च लाभ और अधिक उत्पादन उठा सकते है। इस लेख में, हम आपको मूंगफली की उन्नत खेती के बारे में विस्तृत जानकारी देंगे जिससे आपको खेती में कोई समस्या का सामना नहीं करना पड़ेगा | इसमें हम बताएँगे की कैसे आप बीज चुनेगे , और खेत की तयारी से लेकर आपको सारी जानकारी देने का प्रयास रहेगा | जो आपकी मूंगफली खेती को एक सफलतापूर्वक व्यवसाय बनाने में मदद करेगा।

मुगफली की उन्नत किस्मे

विस्तारी एवं अर्धविस्तारी ऍम -13 , आर.जी . 382 , गिरनार -2 , एवं आर जी 425 .

मूंगफली( झुमका )- आर एस वी 87 , आर जी 141 , टी जी 37A , जे , एल, 24 , एवं एच. एनजी. 10 .

Mungfali Ki Unnat Kheti के लिए खेत की तयारी

मूंगफली लगभग हर प्रकार की मिटटी में उगाई जा सकती है जैसे – रेतीली दोमट , एवं भरी मटियारी दोमट भूमि में अलग -अलग मिटटी में मुगफली बोई जाती है | जब खेत की तयारी के लिए आपको मिटटी पलटने वाला हल से जुताई करे और उसके बाद में देशी हल या हैरो से 2 से 3 बार जुताई करे जिससे भूमि की मिटटी भुरभुरी हो जाये और फिर खेत में पाटा चलाकर मुगफली बीज की बुवाई करे |

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Mungfali Ki Unnat Kheti के लिए बीज दर और बुवाई

  • झुमका किस्म को प्रति हेक्टेयर 100 किलोग्राम बीज की दर से लगाना चाहिए। जिसमे कतरो के बीच की दुरी 30 सेमी और पौधों के बीच की दुरी 10 सेमी होनी चाहिए।
  • फैलने एवं अर्ध विस्तारी किस्मो का 80 किलोग्राम बीज को प्रति हेक्टेयर के दर से बुवाई करना चाहिए | इसमें कतार से कतार के बीच की दुरी लगभग 40 से 45 सेंटीमीटर होना चाहिए और पौधों से पौधों के बीच की दूरी 10 से 15 सेंटीमीटर की होनी चाहिए |

Mungfali Ki Unnat Kheti के लिए बुवाई का उचित समय

मूंगफली के खेती के लिए बढ़िया और उपयुक्त समय जून माह के प्रथम सप्ताह से दूसरे सप्ताह तक कर लेनी चाहिए |

भूमि एवं बीज उपचार

  1. बुवाइ से पहले प्रति किलोग्राम बीज दर से बीज में कार्बोक्सिन 37.5 % + थायरम 37.5 % की 2.5 -3.0% ग्राम अथवा फिर थायरम 75 SP की 3 से 4 ग्राम मात्रा मिलकर खेत का उपचार करना चाहिए |
  2. मूंगफली की फसल में सफ़ेद लट की रोकथाम के लिए आपको क्लोथिएनिडाइन 50 WDG की 2 ग्राम अथवा एमिडाइक्लोप्रिड 17 . 8 SL की मिली . मात्रा की दर से प्रति किलोग्राम बीज को उपचारित करे | बीज में उपचार कम के अंत में बीज को राइजोबियम एवं पी एस बी . कल्चर से उपचारित करके बुवाई करना चाहिए | उपचारित बीज को 30 से 35 मिनट चाय में सूखा कर बुवाई करें |
  3. बीज बुवाई से पहले आप ट्राइकोडर्मा विरिडी की 2 .5 किलोग्राम मात्रा को प्रति हेक्टेयर की दर से 150 किलोग्राम गोबर की खाद में मिलाकर 15 दिनों के मल्टीप्लाई करके ही भूमि में मिलाये एवं यह उपचार गलकर रोग के नियंत्रण में प्रभावी हो पायेगा |

Mungfali Ki Unnat Kheti के लिए खाद एवं उर्वरक

मूंगफली की खेत में आप प्रति हेक्टेयर 60 KG फास्फोरस और 15 KG नाइट्रोजन बुवाई के पहले दाल दें |पोटास की कमी भूमि में न होने पाए इसके लिए आप 30 KG पोटास का भी छिड़काव करे इसको भी बुवाई से पहले | अंतिम में जुताई से पहले आप इसमें 250 किलोग्राम जिप्सम मिलाये |

असिंचित क्षेत्रो में आप 250 जिप्सम और 15 किलो नाइट्रोजन और २० किलोग्राम फास्फोरस मिलाकर छिड़काव करे | बोरान की कमी वाली भूमि में 10 किलो लगभग बोरेक्स / हेक्टेयर बुवाई से पहले डालें |

खरपतवार प्रबंधन

कही पर अगर निराई गोड़ाई में समस्या हो वहां पर सिंचित फसल में खरपतवार नियंतरण के लिए उसमे आप पंडीमिथलीन एक किलोग्राम प्रति हेक्टेयर के दर से 1000 लीटर पानी में घोल बनाकर बुवाई के बाद बीज उगने के पहले उसका छिड़काव करे | इसके बाद उसमे दो बार निराई गुड़ाई के बाद आप 30 से 40 दिन के बाद करे |

बुवाई के लगभग एक महीने बाद झुमका बीज वाले उसमे मिटटी चढ़ाये | जमीन से मुगफली की सुइया देखने के बाद उसमे निराई -गुड़ाई न करे |

Mungfali Ki Unnat Kheti के लिए सिंचाई

• आवश्यकतानुसार एक से दो सिंचाई फूल आने पर और दाना बनते समय करें । जहाँ एक ही सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध हो वहां सिंचाई बुवाई के 55-75 दिन बाद करें।

कीट व रोग प्रबन्धन

कीट प्रबन्धन

सफेद लट : सफेद लट मूंगफली मे लगने वाला प्रमुख कीट है। इस कीट का प्रकोप वर्षा होने के 15 से 20 दिन बाद खेतों में आरम्भ होता है। यह लट फसलों की जड़ों को काट देता है । जिससे कि पूरा पौधा पीला होकर सूख जाता है।

रोग प्रबन्धन :

पत्ती धब्बा रोग : इस रोग का प्रकोप मध्य जुलाई से मध्य अगस्त के बीच होता है ग्रसित पौधों की पत्तियों पर गहरे भूरे रंग के धब्बे बन जाते है जो धीरे-धीरे पूरी पत्तीयों पर फेल जाते है। जिससे कि पौधों की प्रकाश संश्लेषण किया बाधित हो जाती है और उत्पादन पर विपरित प्रभाव पड़ता है ।

नियंत्रण: दुष्प्रभाव दिखने पर मैन्कोजेव 75 डब्लूपी या कार्वेंडाजिम 12% + मैन्कोजेव 63% को 2.0 ग्राम प्रति लीटर पानी की दर से छिड़कें।

कटाई और छनाई

मोटे तौर पर, जब पौधा पीला हो जाए और निचली पत्तियों का अधिकांश हिस्सा गिरने लगे, तो उसे तुरंत इकट्ठा कर लेना चाहिए। पौधों से अलग करने से पहले मामलों को लगभग सात दिनों तक पूरी तरह से सुखाया जाना चाहिए। फलियों को तब तक सुखाना चाहिए जब तक कि उनमें नमी की मात्रा 10% न हो जाए, क्योंकि अधिक नमी वाली फलियों की क्षमता बीमारियों को भड़का सकती है, विशेषकर सफेद फलियों को।

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उपज और वित्तीय लाभ

आगे विकसित रणनीतियों का उपयोग करके, बाढ़ वाले क्षेत्रों में मूंगफली की सामान्य उपज प्रति हेक्टेयर 20-25 क्विंटल हो सकती है। इसके विकास में प्रति हेक्टेयर लगभग 25-30 हजार रुपये का खर्च आता है. यदि मूंगफली की लागत प्रति किलोग्राम 30 रुपये है, तो प्रति हेक्टेयर 35 से 40 हजार रुपये का शुद्ध लाभ प्राप्त किया जा सकता है।

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FAQs

Q.मूंगफली की बुवाई कौन से महीने में की जाती है?

A. मूंगफली के खेती के लिए बढ़िया और उपयुक्त समय जून माह के प्रथम सप्ताह से दूसरे सप्ताह तक कर लेनी चाहिए |

Q.मूंगफली कितने दिनों में तैयार हो जाती है?

A.मूंगफली की खेती लगभग 130 से 140 दिन में तैयार हो जाती है |

Q.मूंगफली की सबसे अच्छी किस्म कौन सी है?

A. विस्तारी एवं अर्धविस्तारी ऍम -13 , आर.जी . 382 , गिरनार -2 , एवं आर जी 425 .
मूंगफली( झुमका )- आर एस वी 87 , आर जी 141 , टी जी 37A , जे , एल, 24 , एवं एच. एनजी. 10 .

Q.मूंगफली उगाने में कितना समय लगता है?

A. मूंगफली की खेती लगभग 120 से 130 दिन में तैयार हो जाती है |

Q. एक एकड़ में मूंगफली कितनी होती है?

A. प्रति एकड़ लगभग 500 कुंतल उपज प्राप्त की जाती है |

Q. मूंगफली में अच्छी पैदावार के लिए क्या करें?

A. मूंगफली की अच्छी पैदावार लेने के लिए एक से कम निराई-गुड़ाई नहीं करनी चाहिए। इससे जड़ों का फैलाव तो अच्छा होता ही है, साथ ही भूमि में वायु का प्रसार भी बढ़ जाता है। और तो और, मिट्टी चढ़ाने का काम भी इसी प्रकार किया जाता है, जिससे रचना बढ़ती है। यह कार्य कोल्पा या हाथ से चलने वाले व्हील कल्टीवेटर से करना चाहिए।

Q. मूंगफली की फसल में कौन कौन सी खाद डालें?

A. मूंगफली की खेत में आप प्रति हेक्टेयर 60 KG फास्फोरस और 15 KG नाइट्रोजन बुवाई के पहले दाल दें |पोटास की कमी भूमि में न होने पाए इसके लिए आप 30 KG पोटास का भी छिड़काव करे इसको भी बुवाई से पहले | अंतिम में जुताई से पहले आप इसमें 250 किलोग्राम जिप्सम मिलाये |
असिंचित क्षेत्रो में आप 250 जिप्सम और 15 किलो नाइट्रोजन और २० किलोग्राम फास्फोरस मिलाकर छिड़काव करे | बोरान की कमी वाली भूमि में 10 किलो लगभग बोरेक्स / हेक्टेयर बुवाई से पहले डालें |

Q. मूंगफली में कितने दिन बाद पानी लगता है?

A. आवश्यकतानुसार एक से दो सिंचाई फूल आने पर और दाना बनते समय करें । जहाँ एक ही सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध हो वहां सिंचाई बुवाई के 55-75 दिन बाद करें।

Q.1 किलो मूंगफली का क्या भाव है?

A. 1 किलो मूंगफली का भाव मार्केट रेट लगभग 140 से लेकर 160 रूपये kg के भाव में बिकता है |

Q. मूंगफली के लिए कौन सी मिट्टी उपयुक्त है?

A. रेतीली दोमट , एवं भरी मटियारी दोमट भूमि में अलग -अलग मिटटी में मुगफली बोई जाती है |

Q.भारत में सबसे अच्छी मूंगफली कहां उगाई जाती है?

A. भारत में मूंगफली आमतौर पर पांच राज्यों में भरी जाती है। ये पांच राज्य हैं आंध्र प्रदेश, गुजरात, तमिलनाडु, कर्नाटक और महाराष्ट्र। ये पांच राज्य फसलों के अंतर्गत आने वाले संपूर्ण क्षेत्र का लगभग 90% प्रतिनिधित्व करते हैं। इन 90% में से 27-30% मूंगफली उत्पादन में गुजरात का स्थान सबसे उल्लेखनीय है।

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