मशरूम की खेती : में भारत प्रथम पोजीशन (No.1) पर

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मसरूम (Masrum) क्या होता है?

मसरूम एक जलवायु नियंत्रक (controler) होता है, जो घर की सीढ़ियों और विभिन्न इमारतों में प्रयोग किया जाता है। यह बीमारी या कीटाणुओं के बढ़ते होने की आशंका से बचाव(Help) करता है। मसरूम की खेती का उपयोग बहुत समय से किया जा रहा है, और इसे संभवतः इस्लामिक उपमहाद्वीप में उत्पन्न किया गया था। आजकल, मसरूम दुनिया भर में उपयोग किया जाता है, और यह अनेक विभिन्न रूपों में उपलब्ध होता है।

मसरूम का उपयोग (Use) कैसे करें?

मसरूम को घर की सीढ़ियों, बाथरूम और किचन में लगाया जाता है। इसके अतिरिक्त , इसे फुलों को फ्रेश रखने के लिए भी प्रयोग किया जाता है। आप , यह भी जान सकते हैं, कि आप इसे खाने के लिए भी इस्तेमाल (Use) कर सकते हैं। यह जलन और त्वचा (Skin) विकारों से बचने में भी मदद करता है।

मसरूम के फायदे (Benefits) क्या हैं?

मसरूम एक बहुत ही उपयोगी औषधि है, जिसे अधिकतर लोग अपनी दैनिक जीवन में उपयोग करते है |

मशरूम की खेती (Mashrum Ki Kheti) कैसे करें घर (Home) पर

यह मसरूम एक उपयोगी औषधि होता है, इसकी एक अच्छी खेती (field) भी हो सकती है। आप अपने घर पर मशरूम की खेती कर सकते हैं। इसके लिए, आपको इसे उगाने के लिए आवश्यक सामग्री की आवश्यकता होगी जो इस प्रकार हैं:

1- मशरूम के छोटे पौधे

2- खाद

3- उपयुक्त मिट्टी

4- पानी

आप निम्न चरणों का पालन करके मशरूम की खेती कर सकते हैं:-

1. मशरूम की खेती (Mashrum ki kheti) के लिए आप एक अलग कंटेनर का उपयोग कर सकते हैं, जो कम से कम 6 इंच गहरा हो जिसमें छेद हों, जिससे वायु आसानी से बाहर निकल सके।

2. फिर आपको मिट्टी की उच्च गुणवत्ता वाली खाद के साथ मिश्रित करना होगा।

3. अब छोटे मशरूम के पौधों को इस मिश्रण में उगाने के लिए तैयार करें।

4. अब आपको पौधों को उगाने के बाद उन्हें , नियमित रूप से पानी देने की आवश्यकता होगी। ध्यान रखें कि मशरूम उगाने के लिए समान धरती और पानी की जरूरत होती है।

मशरूम की खेती (Mashrum ki kheti) में कितना खर्च आता है

मशरूम की खेती (Mashrum ki kheti) में खर्च उसके आवास के साथ-साथ सामग्री, बीज और उपकरणों के लिए भी निर्भर करता है। इसका खर्च भिन्न-भिन्न तरीकों पर निर्भर करता है।

यदि आप मशरूम की खेती (Mashrum ki kheti) के लिए बड़ी स्केल पर जाना चाहते हैं, तो शुरुआती रूप से आपको कुछ निवेश करना हो सकता है। सामग्री और सुविधाएं खरीदने के लिए आपको लगभग 15,000 से 20,000 रुपये तक का निवेश करना हो सकता है।

इसके अलावा, खाद, बीज और उपकरणों के लिए अनुमानित खर्च आपकी स्थानीय बाजार और आपकी खेती के मूल्यांकन पर निर्भर करता है। ध्यान रखें- कि आप उन उपकरणों को ध्यान से चुनें जो आपकी खेती के लिए सबसे उपयुक्त हों।

अधिकतम(Maximum) लागत केवल शुरुआती इन्वेस्टमेंट होती है। जब आप इस व्यवसाय में सफलता प्राप्त करते हैं, तब आप इस व्यवसाय को विस्तार करके और अधिक मुनाफा (Profits) कमा सकते हैं।

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मशरूम की खेती (Mashrum ki Kheti) की ट्रेनिंग Up

मशरूम की खेती के लिए ट्रेनिंग भी उपलब्ध होती है। इस तरह की ट्रेनिंग के जरिए आप मशरूम की खेती से जुड़े तकनीकों को सीख सकते हैं ,और उन्हें अपनी खेती में उतार सकते हैं।

कुछ राज्यों में, कृषि विभाग द्वारा अधिकृत ट्रेनिंग सेंटर शुरू किए जाते हैं ,जो मशरूम की खेती के लिए ट्रेनिंग प्रदान करते हैं। इसके अलावा, कुछ खेती विशेषज्ञ भी मशरूम की खेती (Mashrum ki Kheti) से जुड़ी ट्रेनिंग प्रदान करते हैं।

इसलिए, आपको अपने राज्य में उपलब्ध ट्रेनिंग सेंटर या खेती विशेषज्ञों से संपर्क करके इस विषय में जानकारी प्राप्त करनी चाहिए। इन ट्रेनिंग सेंटरों या विशेषज्ञों से आप मशरूम की खेती (Mashrum ki Kheti)से जुड़ी समस्याओं का समाधान भी प्राप्त कर सकते हैं और खेती में अधिक उत्पादकता हासिल करने के लिए नवीनतम तकनीकों का भी इस्तेमाल कर सकते हैं।

मशरूम की खेती(Mashrum ki Kheti) से लाभ

मशरूम की खेती से कई तरह के लाभ होते हैं।

1. वित्तीय लाभ: मशरूम की खेती से (Mashrum ki Kheti) अधिकतर लोग वित्तीय लाभ कमाते हैं। मशरूम की खेती से एक से अधिक बार फसल निकलती है, जिससे किसानों को निरंतर आय प्राप्त होती है।

2. स्वास्थ्य लाभ: मशरूम खाने से स्वास्थ्य के लिए भी बहुत सारे लाभ होते हैं। मशरूम में विटामिन, प्रोटीन और फाइबर जैसे विभिन्न पोषक तत्व पाए जाते हैं, जो हमारे शरीर के लिए बहुत फायदेमंद होते हैं।

3. पर्यावरण के लिए लाभ: मशरूम की खेती के दौरान अधिकतर किसान जैविक खेती करते हैं। इससे पर्यावरण को बहुत कम नुकसान पहुंचता है, और स्वस्थ(Helth) फसल प्राप्त होती है।

4. स्थानीय विकास: मशरूम की खेती ज्यादातर छोटे किसानों के लिए उपयोगी होती है। इससे स्थानीय विकास को भी प्रोत्साहित किया जा सकता है।

5. रोजगार: मशरूम की खेती एक बड़ा रोजगार का स्रोत होती है। मशरूम की खेती के लिए भर्ती होने वाले लोगो

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मशरूम की खेती

मशरूम की खेती (Mashrum ki Kheti) से कमाई

मशरूम की खेती से कमाई विभिन्न कारकों पर निर्भर करती है, जैसे कि मशरूम की प्रजाति, उपज की मात्रा और विक्रय मूल्य इत्यादि।

मशरूम की खेती (Mashrum ki Kheti) से आमतौर पर हरियाली या फिर अन्य फसलों की खेती की तुलना में अधिक कमाई होती है। अधिकतर मशरूम उत्पादकों द्वारा एक फुटी के लिए 20 से 25 रुपये तक का मूल्य निर्धारित किया जाता है। इससे आप अनुमान लगा सकते हैं , कि प्रति किलोग्राम मशरूम से कितनी कमाई होती है।

अधिकतर(Maximum) किसान एक फुटी के लिए 15 से 20 किलोग्राम मशरूम उत्पादन करते हैं। इससे उन्हें लगभग 300 से 500 रुपये तक की कमाई प्रति फुटी होती है। इस तरह, यदि आप 1000 फुटी भूमि का उपयोग करते हुए मशरूम की खेती (Mashrum ki Kheti) करते हैं, तो आप मानसून के दौरान लगभग 3 लाख से 5 लाख रुपये तक कमाई कर सकते हैं।

मशरूम की खेती करने के लिए सरकार द्वारा विभिन्न सब्सिडी भी प्रदान की जाती हैं।

मशरूम की खेती (Mashrum ki Kheti) का ब्यापार

मशरूम की खेती एक बहुत ही लाभदायक व्यवसाय हो सकता है। इस व्यवसाय में लागत कम होती है और कम समय में अधिक मुनाफा कमाया जा सकता है। मशरूम उत्पादकों की मांग भी दिन-प्रतिदिन बढ़ती जा रही है। इसलिए, मशरूम की खेती का (Mashrum ki Kheti) व्यवसाय एक स्थिर और लाभदायक व्यवसाय हो सकता है।

आप मशरूम की खेती से पैसे कमाने के लिए न सिर्फ कृषि उत्पादों की बिक्री में शामिल हो सकते हैं, बल्कि इस बिजनेस के अंतर्गत उत्पादों की नई रेंज भी विकसित कर सकते हैं। मशरूम उत्पादों की नई रेंज तैयार करने से आप अपने व्यवसाय को नई ऊंचाइयों तक ले जा सकते हैं, और अधिक मुनाफा कमा सकते हैं।

इस व्यवसाय को शुरू करने के लिए आपको मशरूम की खेती (Mashrum ki Kheti)के लिए जगह और उपकरणों की आवश्यकता होगी। अधिकतर व्यवसायी मशरूम की खेती को अंतर्राष्ट्रीय बाजार में भी बेचते हैं, जिससे अधिक मुनाफा कमाया जा सकता है।

मशरुम नुट्रिशन(Nutrition)

मशरूम का सेवन स्वस्थ जीवन के लिए बहुत फायदेमंद हो सकता है। मशरूम में प्रोटीन, विटामिन बी12, विटामिन डी, फोलिक एसिड, फाइबर और अन्य विटामिन और मिनरल शामिल होते हैं।

मशरूम में प्रोटीन की अधिक मात्रा होती है, जो शरीर के मांसपेशियों को बनाए- रखने में मदद करता है। मशरूम में विटामिन बी12 का भी अधिक मात्रा होता है, जो शरीर के रक्त सेलों को बनाए रखने में मदद करता है। विटामिन डी मशरूम में कम मात्रा में होता है, लेकिन यह भी शरीर के लिए जरूरी होता है। फोलिक एसिड मशरूम में भी अधिक मात्रा में होता है, जो गर्भावस्था के दौरान बच्चे के निर्माण में मदद(Help) करता है।

मशरूम में फाइबर की भी अधिक मात्रा होती है ,जो पाचन तंत्र को स्वस्थ रखने में मदद करता है। इसके अलावा, मशरूम में न्यूट्रिएंट ऑक्सीडेंट्स भी होते हैं ,जो शरीर के लिए बहुत फायदेमंद होते हैं।

मशरुम प्राइस पैर kg

मशरूम की कीमत(Mashrum ki kheti) प्रति किलोग्राम विभिन्न शहरों और बाजारों में भिन्न होती है। इसकी कीमत स्थान के अनुसार अलग-अलग होती है। आमतौर पर, भारत में मशरूम की कीमत 100 से 200 रुपए प्रति किलोग्राम होती है। इसमें कुछ शहरों में मशरूम की कीमत ज्यादा हो सकती है, जबकि कुछ अन्य शहरों में कम हो सकती है।

मशरूम कितने प्रकार की होती है

मशरूम कई प्रकार की होती हैं, जिनमें से कुछ ज्यादा पसंद की जाती हैं। कुछ मुख्य प्रकार निम्नलिखित हैं:

1. बटन मशरूम:- यह सबसे आम मशरूम है, और सबसे ज्यादा उपयोग किया जाता है। इसकी छोटी आकार और आसानी से उगाई जाने वाली विशेषता होने के कारण इसे बटन मशरूम के नाम से जाना जाता है।

2. क्रीमी मशरूम:- इस प्रकार का मशरूम बटन मशरूम से थोड़ा बड़ा होता है, और इसकी अंदरूनी सफेद भाग ज्यादा होता है। यह आसानी से तलने वाला होता है, और सब्जियों में खास रुचि लेने के कारण लोगों की पसंदीदा मशरूम है।

3. शीतल मशरूम:- यह मशरूम शीतल मौसम में उगाया जाता है ,और इसे पानी में उबालकर खाया जाता है। यह मशरूम थोड़ा छोटा होता है ,और इसका रंग सफेद होता है।

4. पोर्टोबेलो मशरूम:- इस प्रकार का मशरूम बटन मशरूम से थोड़ा बड़ा होता है, और इसकी ऊपरी सतह अंगूरी रंग की होती है। यह आसानी से पकने वाला होता है |

कम्पोस्ट बनाने की विधि

कम्पोस्ट एक बहुत ही उपयोगी उत्पाद होता है, जो खेती में उपयोग किया जाता है। कम्पोस्ट बनाने के लिए निम्नलिखित विधि का पालन कर सकते हैं:

1.सबसे पहले, कम्पोस्ट पिले के लिए एक ठोस आधार का चयन करें। आप एक बड़ा प्लास्टिक कंटेनर, कम्पोस्ट पिट, या फिर एक लकड़ी का कम्पोस्ट बॉक्स भी चुन सकते हैं।

2.अब एक लेयर मिट्टी को ठंडा करें और उसे अपने चयनित (Selected) आधार पर डालें।

3.अब एक लेयर अच्छी गुणवत्ता वाले खाद को डालें। आप गोबर, पत्ते, खाद, आदि का उपयोग कर सकते हैं। खाद की यह लेयर कम से कम 4 इंच की होनी चाहिए।

4.इसके बाद, कुछ मिट्टी या मिट्टी के अंश को फैलाएं और उस पर एक निम्न -वितरण में बीजों को बिछाएं। इसमें कुछ भी बिछा सकते हैं जैसे कि मटर, चोटी वाली फलियां, बीज, आदि।

5. इसके बाद, एक नई खाद की लेयर को बीच में डालें। इस प्रक्रिया को बार-बार दोहराएं जब तक कि कम्पोस्ट पिला नहीं हो जाता है|

मशरूम कितने दिन में तैयार होती है

जब आप मशरूम की खेती(Mashrum ki kheti) करते हैं, तो मशरूम तैयार होने में लगभग 70 से 90 दिनों का समय लगता है। इसमें बीज की उगाई, समय-समय पर सिंचाई, खाद का उपयोग और समय-समय पर जैविक उपचार शामिल होते हैं।

बीजो को रखने में सावधानियां

मशरूम की खेती में बीजों को रखते समय कुछ सावधानियों का ध्यान रखना बहुत महत्वपूर्ण होता है। इन सावधानियों को निम्नलिखित रूप से समझाया जा सकता है:

1. सुनिश्चित करें कि बीज विशुद्ध और स्वस्थ हैं। बीजों का चयन करते समय केवल अच्छी गुणवत्ता वाले बीजों का चयन करें।

2. बीजों को धो लें और इन्हें उपयुक्त दवाई से उपचार करें।

3. बीजों को सूखे और ठंडे स्थान पर रखें। बीजों को बहुत गर्म या गीले स्थानों पर नहीं रखना चाहिए।

4. बीजों को लंबे समय तक नहीं रखना चाहिए। उन्हें जल्द से जल्द बुवाई के लिए उपयोग किया जाना चाहिए।

5. बीजों को समय-समय पर उलट-सीधा करें। इससे बीजों का विकास आसान होता है ,और उन्हें संभवतः संक्रमण से बचाया जा सकता है।

इन सावधानियों का पालन करने से आप मशरूम की बेहतर उत्पादकता प्राप्त कर सकते हैं।

मशरूम की बुवाई

मशरूम की बुवाई आमतौर पर दो तरीकों से की जाती है:

1. सीधी बुवाई:- इसमें मशरूम के छोटे बीज को एक बार में खेत की मिट्टी में उगाया जाता है। इस तरीके को सबसे आसान तरीका माना जाता है।

2. बेड सिस्टम बुवाई:- इस तरीके में, मशरूम के छोटे बीज को धातु या प्लास्टिक से बनी ट्रे में बोया जाता है। इसके बाद ट्रे को एक बेड में रखा जाता है, जिसमें शब्दावली या विशेष मिट्टी का उपयोग किया जाता है। बेड को एक स्थान पर रखा जाता है जिसमें उचित तापमान, नमी और हवा वातावरण बनाए रखा जाता है। इस तरीके में मशरूम के उत्पादन में अधिकतम उत्पादकता होती है।

मशरूम की बुवाई से पहले उपयुक्त जमीन की तैयारी और शुद्धता का ध्यान रखना बहुत महत्वपूर्ण होता है।

मशरूम की उन्नत किस्में

मशरूम की उन्नत किस्में कुछ इस प्रकार हैं:

1. शाइटेक मशरूम:- इसका रंग सफेद होता है, और इसकी टेक्स्चर बहुत मुलायम होती है।

2. क्रिमिनी मशरूम:- इसका रंग काला या भूरा होता है, और इसकी शाखाएं लम्बी होती हैं।

3. पॉर्टोबेलो मशरूम:– इसका रंग भूरा होता है और इसकी टेक्स्चर अत्यधिक मुलायम होती है।

4. ओयेस्टर मशरूम:– इसका रंग सफेद या समीरण होता है ,और इसकी शाखाएं चमकदार और गोल होती हैं।

5. शियताके मशरूम:- इसका रंग भूरा या समीरण होता है, और इसकी शाखाएं पतली होती हैं।

6. मैदा मशरूम:- इसका रंग सफेद होता है, और इसकी शाखाएं छोटी होती हैं।

7. आगरिकस मशरूम: -इसका रंग भूरा होता है, और इसकी शाखाएं बड़ी होती हैं।

ये सभी मशरूम की उन्नत किस्में हैं जो अधिकतर देशों में उगाई जाती हैं।

मशरूम का वैज्ञानिक नाम

मशरूम का वैज्ञानिक नाम “Agaricus bisporus” है।

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मशरूम की खेती Related Some Common Question and Answers

मशरूम की खेती कितने दिन में तैयार हो जाती है?

मशरूम की खेती लगभग 28 से 30 में सुरुवात होने लगती है |

1 एकड़ में कितना मशरूम उगाया जा सकता है?

लगभग हर एक चक्र में 1000 किलोग्राम उपज निकलने की संभावना होती है |

सबसे तेजी से बढ़ने वाला मशरूम कौन सा है?

सबसे तेज तैयार होने वाली सेप मशरूम जो की 14 से 15 दिन में तैयार होने लगती है |

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