अफीम की खेती-(Opium ) और लाइसेंस कैसे लें और कितनी भूमि चाहिए?

अफीम की खेती-(poppy cultivation)

अफीम की खेती इतनी आसान भी नहीं होती | इसके लिए आपको सबसे पहले सरकार से लाइसेंस के विषय में बात करना होता है अगर लाइसेंस मिल जाये तो उसके बाद सरकार अपनी प्रक्रिया के मुताबिक अफीम खरीदती है , आप से | अफीम की खेती में कई बातो को ध्यान में रखना पड़ता है |

अफीम का परिचय

शायद आप अफीम के बारे में जरूर जानते होंगे |चलिए कोई नहीं हम बता देते है ,अफीम वही है जिसे आप सोच रहे है , हाँ जी हाँ अफीम एक प्रकार का नशा ही है जिसे नशा करने में उपयोग करते है लोग |आपका यह भी जानना जरुरी है की अफीम कहा से और कैसे पैदा होती है तो आपको को बता दू की अफीम की खेती की खेती है |अफीम एक नशीला मादक पदार्थ है,और इसके लिए सरकार खुद लाइसेंस देने का कार्य करती है ,क्यकि इसकी सहयता से कुछ मेडिसिन्स भी बनाई जाती हैं | इसलिए अफीम की खेती करने के लिए लाइसेंस आसानी से नहीं मिल पता है |अफीम की खेती(poppy cultivation) करने के लिए सरकार की कुछ शर्तो एवं नियमो को मानना पड़ता है | आइये जानते है की अफीम की खेती कैसे करे ?,और लाइसेंस कैसे लेना है | कुछ बातो पर निम्न चर्चा करंगे | जानकारी के लिए हमारे साथ बने रहे —

अफीम का बीज कहां से मिलता है और लाइसेंस कैसे प्राप्त करे ?

अफीम की खेती करने के लिए सबसे पहले सरकार से हमको लाइसेंस लेना पड़ता है |अफीम की खेती का लाइसेंस इतनी आसानी से नहीं मिलता | जबकि इसकी खेती के लिए कुछ खास जगहों की जरुरत पड़ती है | और आपका का जानना जरुरी है की इसके लिए कितने खेती (भूमि )की जरुरत पड़ती है | यह भी बहुत जरुरी होता है लाइसेंस के लिए | इसकी खेती मतलब अफीम की खेती करने के लिए वित्त मंत्रालय के द्वारा प्राप्त किया जा सकता है | लाइसेंस लेने लिए आपको सरकार की कुछ सरतो को और नियमो की लिस्ट आप क्राइम ब्यूरो ऑफ नारकोटिक्स के जरिये जान सकते है | और नियमो और सरतो की ज्यादा जानकारी के लिए आप Official वेबसाइट को भी देख सकते हैं |

इन संस्थान ( इंस्टीट्यूट्स ) से आपको अफीम के बीज उपलब्ध हो जायेंगे |

अफीम की कुछ उन्नत किस्मे

जवाहर अफीम-539 , जवाहर अफीम-16, और जवाहर अफीम-540 जो की काफी प्रसिद्द प्रजाति है |

हमे अगर प्रति हेक्टेयर में बीज की जरुरत वाली मात्रा की बात करना हो तो हम लगभग 7-8 किलोग्राम लगती है | और यदि आप बिना लाइसेंस के आप अफीम की खेती नहीं कर सकते , नहीं तो आपके ऊपर केस होने का अवसर या कानूनी कार्रवाई कर सकती है |

कब और कैसे करे ,अफीम की खेती ?

अफीम की खेती करने के लिए ठंढे मौसम की आवश्यकता होती है इसलिए इसको अक्टूबर से लेकर नवंबर माह में की जाती है | अफीम की खेती से पहले भूमि को तीन या चार बार जुताई कर लेना चाहिए | भूमि जुताई के बाद खेत में आवस्यक मात्रा में गोबर की खाद(जैविक खाद )या वर्मी कंपोस्ट खाद डालना चाहिए,जिससे पौधों के विकास में कोई कमी न ए और पौधे अच्छे से उग सके |

अफीम की खेती करते समय आपको एक और बात का ध्यान करना चाहिए की कुछ चयनित सीमा में ही पैदावार तैयार करनी चाहिए | इसके पौधों को पोषण की कमी नहीं होनी देनी चाहिए |यह भी जरुरी है अगर आप अफीम की खेती से पहले भूमि चाँच करा ले तो अतिउत्तम |जिससे की आपको नुकसान होने का मौका काम रहेंगे |

अफीम की कटाई कब और कैसे होती है?

अफीम की खेत में बीज लगाने के 100-120 दिनों के बाद उसमे फूल आने सुरु हो जाते है | जैसे -जैसे समय बीतता जाता है इसके फूल झड़ने लगते है और उसमे डोडे पड़ने लगते है | हम आपको बताना चाहते है की इसकी कटाई (हार्वेस्टिंग) एक दिन में नहीं की जा सकती है | इसकी कटाई रोज थोड़ी थोड़ी की जाती है |

और इसको एक अच्छी तरीके से इसमें चीरा लगया जाता है जिससे, इसमें एक तरल पदार्थ निकलता है जिसे निकलने के लिए सारी रात छोड़ दिया जाता है , और उसके दूसरे दिन सुबह में घूप निकलने से पहले इससे निकला हुआ पदार्थ को इकट्ठा कर लिया जाता है |जो जमा करने के बाद काले कलर का हो जाता है | इस प्रकृया को तब तक किया जाता है जब तक इसमें से तरल पदार्थ निकलना बंद न हो जाये |

जब यह तरल पदार्थ निकलना बंद हो जाता है तब इसको सूखने देते है | जब इसके डोडे सही से सुख जाती है तो इसको काटकर इससे बीज निकल लिया जाता है | किसान निकले हुए बीज को बाजार में बेच भी सकते है जिससे उनकी थोड़ी कमाई हो जाती है | बाकि मटेरियल को खस खस कहा जाता है और इसको भी किचन के मसाले में प्रयोग किया जा जाता है |
वर्ष के अप्रैल माह में नार्कोटिक्स विभाग किसानो के अफीम की पैदावार को खरीद लेते है |

अफीम की खेती की सम्पूर्ण जानकारी ,अफीम  ki kheti | poppy कल्टीवेशन

जिससे इसकी कालाबाजारी को रोका जाता है | अफीम की खेती से आप को लगभग एक हेक्टेयर में करीब 50 से 60 किलोग्राम अफीम का लेटेक्स प्राप्त करते हैं |अपनी सरकार इसे बहुत ही साधारण मूल्य पर खरीदती है |
लेकिन अफीम की कीमत काले बाजार में ज्यादा मिलती है |वास्तव में सरकार अफीम की खेती का लाइसेंस इसलिए देती है क्योकि इससे बहुत सारी दवाइया बनायीं जाती है |परन्तु बहुत लोग इसका उपयोग नशे के लिए करते है |

अफीम की कीमत काले बाजार एक किलोग्राम की लगभग 1 से 1.5 लाख रुपये की हो सकती है परन्तु सरकारी रेट लगभग 2500 से 3000 प्रति किलोग्राम होती है | अफीम की खेती से कई चीजे बेचीं जाती है यहां तक की इससे निकलने वाला वैस्ट पदार्थ भी बेचा जाता है | और इसको भी सरकारी बिभाग के अधिकारी अपने साथ ले जाते हैं जिससे किसी अन्य प्रकार का गलत प्रयोग ना किया जा सके |

अफीम की खेती की चुनौतियां :

अफीम की खेती में बहुत सारी चुनौतियां भी आती है | सबसे पहले भारत सरकार से इसकी कीमत बहुत कम मिलती है और यदि उत्पादन में कमी हुयी तो भी एक समस्या है | कुछ समय लाइसेंस लेने में लग जाता है और इससे फुर्सत पाओ तो आ गए तोते , इनको अफीम के डोडे बहुत पसंद होते है | यदि तोते खा ले तो इन्हे नशा होने लगता है |इससे इनको आनंद की वजह से इनकी लत पद जाती है और यह बार बार खाना सुरु कर देते है |

जिससे किसान भाइयो को काफी नुकसान का सामना करना पड़ता है |
इसका लाइसेंस भी काम लोगो को ही जारी हो पता है |यदि कोई किसान भाई अपना लाइसेंस सरेंडर करेगा तो ही सरकार नए लाइसेंस जारी करेगी | इसकी जब तक दवाओं के अतिरिक्त और कोई कार्य न होगा तब तक इसका लाइसेंस लिमिटेड ही रहेगा |

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अफीम का बीज कहाँ मिलता है?

इन संस्थान ( इंस्टीट्यूट्स ) से आपको अफीम के बीज उपलब्ध हो जायेंगे |

afim ki kheti ke liye license

लाइसेंस लेने लिए आपको सरकार की कुछ सरतो को और नियमो की लिस्ट आप क्राइम ब्यूरो ऑफ नारकोटिक्स के जरिये जान सकते है |

एक तोले अफीम की कीमत?

फसल की गुडवत्ता के अनुसार इसकी कीमत होती है |

भारत में सबसे ज्यादा अफीम की खेती कहां होती है?

भारत में अफीम की खेती सर्वाधिक राजस्थान और मध्य प्रदेश में की जाती है।

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