रामदाना की खेती कैसे करें की विस्तार से जानकारी 2023

महत्व एवं उपयोग :

रामदाना ki kheti ka Parichay

रामदाना की खेती से सिर्फ दाना ही नहीं, बल्कि फसल से जानवरों के लिए चारा भी प्राप्त होता है, इसके साथ ही दाने को लड्डू, पट्टी और लइया के रूप में भी उपयोग किया जाता है। इसका प्रयोग व्रत में किया जाता है। रामदाना में प्रोटीन 12-15 प्रतिशत, वसा (6-7 प्रतिशत )

फीनालल्स 0.045-0.068 प्रतिशत एवं एन्टीआक्सीडेन्ट डी०पी०पी० एच 22-27 प्रतिशत पाया जाता है।

रामदाना की खेती कैसे करें

बुवाई का समय :

इसकी खेती खरीफ एवं रबी दोनों सीजन में की जाती है। भारत में जम्मू कश्मीर, हिमाचल प्रदेश. उत्तराखण्ड, तमिलनाडु, बिहार गुजरात, पूर्वी उत्तर प्रदेश, बंगाल एवं हिमाचल प्रदेश इत्यादि में मिलेट्स फसल के रूप में उगाते है।

जलवायु :

 गुणवत्तापूर्ण खेती केवल गर्म और आर्द्र जलवायु के दौरान ही की जा सकती है, उन सभी स्थानों पर जहां वर्षा कम होती है।

उन्नतशील प्रजातियाँ :

जी0ए0-1 यह किस्म 110-115 दिन में पक कर तैयार होती है। इसके पौधे की ऊँचाई 200-210 सेमी0, बाली का रंग हल्का हरा एवं पीला, 1000 दाने का वजन 8.0 ग्राम, उपज 20-23 कुन्तल प्रति हे0 है ।

toyo-2:

यह किस्म 98-102 दिन में पक कर तैयार होती है। पौधो की ऊँचाई 180-190 सेमी0, बाली का रंग लाल, 1000 दाने का वजन 8.0 ग्राम, उपज 23-25 कुन्तल प्रति हे0 है।

अन्नपूर्णा :

यह किस्म 105 – 110 दिन में पक कर तैयार होती है। इसके पौधों की ऊँचाई 200- 205 सेमी बाली का रंग हरा एवं पीला होता है । उपज 20-22 कुन्तल प्रति हे0 है ।

खेत की तैयारी :

खेत की एक जुताई मिट्टी पलटने वाले हल से तथा 2-3 जुताई उन्नत कृषि यंत्रों से या हैरो से करनी चाहिए। जुताई के बाद पाटा लगाकर खेत को भुरभुरा कर लेना चाहिए ।

बीज की दर एवं उपचार :

एक किग्रा. बीज प्रति हे0 की दर से प्रयोग करते है । थीरम 2-2.5 ग्राम से 1 किग्रा. बीज का उपचार करना चाहिए ।

बोने का समय :

मानसून के दौरान जून के अंतिम सप्ताह से जुलाई के मध्य तक बुआई करनी चाहिए.

बोने की विधि:

रामदाना की बुआई  खेत में बीज छिड़ककर, जुताई कर समतल करें

 रामदाना की लाइन में बोआई :

लाइन से लाइन की दूरी 45 सेमी. और पौधे की दूरी 15 सेमी रखी जाती है. कूड़े की गहराई 2 इंच से 3 इंच की दूरी पर रखें।

खाद एवं उर्वरक :

60 किग्रा. नत्रजन, 40 किग्रा. फास्फोरस एवं 20 किग्रा. पोटाश प्रति हे0 की आवश्यकता पड़ती है। बुआई के समय नत्रजन की आधी मात्रा फास्फोरस एवं पोटाश की सम्पूर्ण मात्रा देनी चाहिए, नत्रजन की आधी मात्रा का दो बार में छिड़काव करना चाहिए ।

सिंचाई :

खरीफ मौसम में सिंचाई वर्षा के आधार पर की जाती है।

निराई-गुड़ाई: बीज बोने के 20-25 दिन बाद खेत की निराई-गुड़ाई की जाती है। फसल की दो बाद निराई-गुड़ाई अवश्य करनी चाहिए ।

कटाई-मड़ाई : फसल पीले पड़ने के बाद कटाई – मड़ाई कर लेनी चाहिए ।

उपज : 20-25 कुन्तल प्रति हे० पैदावर होती है।

कीट :

बिहार हेयरी कैटर पिलर :

इसकी सूण्ड़ी पत्तियों का हानि पहुँचाती है। कभी-कभी तने पर भी आक्रमण करती हैं। फेनवलरेट 0.4% 15-20 किग्रा. प्रति हे0 की दर से प्रयोग करने पर नियन्त्रण हो जाता है ।

बीमारियां एवं रोकथाम :

ब्लास्ट (झोंका) व सड़न आदि बीमारियों का आक्रमण होता है। खड़ी फसल में जिनेब 75 प्रतिशत डब्लू.पी. 1.5-2.0 किग्रा./हे. की दर से छिड़काव से रोग का प्रभाव कम हो जाता है।

रामदाना की तासीर

रामदाना की तासीर गरम होती है। यह खासतर सुबह के समय शरीर को गरमी प्रदान करता है। इसका सेवन शरीर की ऊर्जा को बढ़ाने में मदद कर सकता है। इसके अलावा, यह मानव शरीर को विभिन्न पोषण तत्वों से भरपूर बनाता है, जैसे कि प्रोटीन, विटामिन, और मिनरल्स। रामदाना की तासीर के कारण इसका सेवन गर्मियों में अधिक फायदेमंद हो सकता है, जब शरीर अधिक ऊर्जा की आवश्यकता होती है।

रामदाना के फायदे

रामदाना का सेवन कई स्वास्थ्य लाभ प्रदान कर सकता है। यह एक पौष्टिक अनाज है जिसमें प्रोटीन, फाइबर, विटामिन, और मिनरल्स भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं। यहाँ कुछ मुख्य फायदे हैं:

  1. पौष्टिकता: रामदाना आपको ऊर्जा प्रदान करता है और आपके शारीरिक स्वास्थ्य को बनाए रखने में मदद करता है।
  2. डायटरी फाइबर: इसमें मौजूद फाइबर आपके पाचन तंत्र को स्वस्थ रखने में मदद करता है और पाचन क्रिया को बेहतर बनाता है।
  3. प्रोटीन: यह एक अच्छा स्रोत है पौष्टिक प्रोटीन का, जो मांसाहारी और अमांसाहारी आहार के चयनित स्रोतों के साथ मिलता है।
  4. विटामिन और मिनरल्स: रामदाना में विटामिन और मिनरल्स की अच्छी मात्रा होती है, जैसे कि फोलेट, विटामिन ए, विटामिन सी, मैग्नीशियम, और आयरन।
  5. वजन नियंत्रण: रामदाना का सेवन करके आप अपने वजन को नियंत्रित कर सकते हैं, क्योंकि इसमें फाइबर होता है जो आपको भूख कम महसूस करने में मदद करता है।
  6. हृदय स्वास्थ्य: रामदाना में पाए जाने वाले विटामिन और मिनरल्स आपके हृदय के लिए भी फायदेमंद होते हैं और आपके रक्तदाब को सामान्य रखने में मदद कर सकते हैं।
  7. डायबिटीज का प्रबंधन: रामदाना का सेवन करके ब्लड सुगर को नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है।

ध्यान दें कि यदि आप किसी विशेष चिकित्सा शर्त में हैं या डाइट प्लान के बारे में सलाह लेना चाहते हैं, तो आपको एक पेशेवर स्वास्थ्य पेशेवर से परामर्श करना चाहिए।

रामदाना in English

“रामदाना”

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