सिंदूरी अनार की खेती से कम खर्च में अच्छा मुनाफा।

सिंदूरी अनार की खेती का परिचय

सभी किसान भाई अगर अच्छा कामना चाहते है तो सिंदूरी अनार की खेती एक अच्छा बिकल्प है सभी किसान भाइयो के लिए और इसकी खेती में कम समय और कम खर्च में स अच्छा मुनाफा कमाने के एक अच्छा मौका।यह किसान भाइयो के लिए एक फायदेमंद खेती हो सकती अगर इसको अच्छे तरीके से कर लिया जाये। अनार की खेती में अनार जैसे दिखने वाले सिंदूरी अनार की खेती से लोग अच्छा पैसा बना रहे है। आज हम इस ब्लॉग पोस्ट में जानेगे की सिंदूरी अनार की खेती कैसे करे और इसके क्या फायदे है।

जैसा की आप लोग जानते है की बाजार में अनार का जूस और लोगो के मन में अनार के प्रति प्यार और डाक्टर की सलाह में अनार के फायदे कितने होते आप जानते ही है। और इन्ही कारणों से अनार की मांग बहुत ज्यादा हो गयी है और इसी लिए हम सिंदूरी अनार की खेती जो अनार जैसा दिखने और अनार के सरे गुड़ वाली खेती करने के बारे में बिस्तार से जानकारी देंगे।

सिंदूरी अनार की खेती के लिए सही जलवायु और मिट्टी का उपयोग

हम सिंदूरी अनार की खेती लगभग हर तरह की भूमि में कर सकते हैं या किया जा सकता है। सिंदूरी अनार की खेती के लिए गर्म स्थान बहुत सही बैठता है। जैसा की आपको पहले ही बताया की इसमें कम खर्च होता है और फायदा ज्यादा होता है तो इसमें निवेश बहुत कम होता है और इसकी खेती के सुरवाती 4 साल के बाद फल देना सुरु हो जाता है।

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सिंदूरी अनार की खेती में पौधा रोपण का तरीका

आज हम देखते है की सिंदूरी अनार की खेती के लिए पौधा रोपण करने के लिए आप एक महीने पहले से जमीन में गड्ढा खोद ले। गड्ढे की लम्बाई 60 CM और चौड़ाई भी 60 CM गहरे होना चाहिए। और इनके आपस की दुरी लगभग 5 मीटर रखना है। इसके लिए खाद में लगभग 20 किलोग्राम पाकी हुयी खाद गड्ढे में डाल दे।

सिंदूरी अनार की खेती सिंचाई की व्यवस्था

आप इसकी खेती में सर्दी के मौसम में 13 दिन के अंतर में सिचाई कर सकते है जबकि गर्मी के मौसम में सिंदूरी अनार की खेती में आप हर एक सप्ताह में सिंचाई कर सकते है और अगर आप इसकी खेती में फुहारे दार सिचाई की व्यवस्था करदे तो इसकी खेती के लिए सोने पर सुहागा होगा। क्योकि इसमें अगर आप बूंद-बंद की सिंचाई करते है तो फल को जयदा लाभ मिलेगा और यह फायदेमंद होगा।

सिंदूरी अनार फलों की तुड़ाई

आप सिंदूरी अनार की तुड़ाई उस समय कर सकते है जब ये फल पक जाये। इसकी तोड़ाई का सही समय आप को 4 महीने के बाद का होता है। तब तक फल अच्छे से पाक जाते है।

एक पेड़ से मिलने वाले फल की संख्या

सिंदूरी अनार की खेती में आप को लगभग एक पेड़ से 100 किलोग्राम से ज्यादा फल मिल जाते है। और यदि हम इसकी फायदे की बात करे तो एक एकड़ में किसान लगभग 10 लाख रुपया आराम से कमा सकता है और अपनी जीवन खुस हॉल बना सकता है।

जानते है की इसकी खेती से कितने वर्ष तक फायदा होता है

आप जानते है की इसके खेती में समय तो लगता है पर एक बार लगाओ और 25 तक फायदा उठाओ। इसके आनर में अच्छी गुड़वत्ता वाले बिटामिन और A , E और C पायी जाती है जो बढ़ती उम्र के लक्षण को रोकती है। और इसकी सेवन से त्वचा की ऊपरी परत सही करने में और कोशिकाओं को सुर‍क्षित और इसकी निर्माण में शामिल कुछ जरुरी बातें।

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अनार की खेती में प्रमुख्य किस्में

सीकर. शेखावाटी के धोरों ने सिन्दूरी अनार को प्राथमिकता दी है। आदर्श वातावरण के कारण, क्षेत्र में कई स्थानों पर सिन्दूरी अनार के पेड़ फल-फूल रहे हैं। केवल छह वर्षों में सीकर क्षेत्र सिन्दूरी अनार के लिए राज्य में अग्रणी स्थान पर आ गया है। इसके साथ ही पशुपालकों की किस्मत बदल गई है. वर्तमान में क्षेत्र में लगभग 1500 हेक्टेयर क्षेत्र में सिन्दूरी अनार का विकास किया जा रहा है। विशेषज्ञों की मानें तो अगले दो वर्षों में 2,000 हेक्टेयर में सिन्दूरी अनार का विकास शुरू हो जाएगा।

तीन साल में निर्माण शुरू करें

सार्वजनिक कृषि मिशन योजना के तहत सीकर क्षेत्र में सिन्दूरी अनार विकास का कार्य वर्ष 2008-09 में प्रारम्भ किया गया। सिन्दूरी अनार का पौधा तीन साल में पैदावार देना शुरू कर देता है। सिन्दूरी अनार का बाग लगाने के लिए खेती प्रभाग द्वारा प्रति हेक्टेयर 30,000 रुपये तक का पुरस्कार दिया जाता है। अनार की विभिन्न किस्मों की तुलना में, सिन्दूरी अनार ठोस, स्वादिष्ट और निर्यात योग्य हैं।

अनार की खेती की किस्मो का चयन सावधानी पूर्ण

भारत देश में और बिदेशो में भी अनार की खपत ज्यादा और मुनाफे के लिए लोग इसकी खेती में रुझान दिखाना सुरु कर दिए है परन्तु इसकी खेती के किस्मो का चयन एकदम सबधाणी पूर्ण करे और विशेसग्यो से सलाह जरूर ले ताकि आपको इसकी खेती का भरपूर लाभ मिल सके। आइये कुछ किस्मो के बारे में और उनके गुड़ के बारे में जानकारी :

गणेश : यह किस्म को साल 1936 में तैयार किया गया था। कुछ समय बाद इसका नाम साल 1970 एलन डी से गणेश नाम रख दिया गया। इस किस्म का फल लगभग वजन में 200 से 300 ग्राम तक होता है। यह खाने में उच्चा गुडवत्ता वाले अनार होते है इसकी बाजार में काफी मांग होती है।

केसर: इस वर्गीकरण का सबसे बड़ा घटक यह है कि इसके जैविक उत्पाद कम फटते हैं। यह देखने में असाधारण रूप से आकर्षक और चमकदार है। इसके बीज लाल, कोमल और मीठे होते हैं। प्रत्येक प्राकृतिक उत्पाद का माप 250 से 300 ग्राम होता है। प्रेषण परिप्रेक्ष्य के अनुसार यह सर्वोत्तम वर्गीकरण है।

जोधपुर रेड: इसका विकास अधिकतर उत्तर-पश्चिमी क्षेत्रों में होता है। अन्य किस्मों की तुलना में इस किस्म के पौधे बड़े होते हैं, साथ ही फलों के नष्ट होने की समस्या भी कम होती है। बीज 60 से 65 प्रतिशत रस से भरे होते हैं।

आरक्ता: इस किस्म के फलों का आकार बहुत बड़ा होता है। इसके दाने नाजुक, लाल और मीठे होते हैं। प्रति पौधा 30 से 35 किलोग्राम प्राकृतिक वस्तुएं पहुंचाई जाती हैं।

सिन्दूरी: यह किस्म वर्ष 2008-09 में तैयार की गई थी। इसकी खासियत यह है कि पौधा 3 साल का होने के बाद प्राकृतिक चीजें देना शुरू कर देता है। इसकी प्राकृतिक चीजें देखने में जितनी आकर्षक होती हैं, खाने में उतनी ही स्वादिष्ट होती हैं।

और इसप्रकार सुंदरी अनार की खेती से हमे लाभ के सिवा घाटा नहीं होता है।

FAQs

Q.अनार का पौधा कितने साल में फल देता है?

A. आप सिंदूरी अनार की तुड़ाई उस समय कर सकते है जब ये फल पक जाये। इसकी तोड़ाई का सही समय आप को 4 महीने के बाद का होता है। तब तक फल अच्छे से पाक जाते है।

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